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कागज पर काटे प्लॉट, जनता का पैसा लेकर भाग गए कारोबारी

लक्ष्मी नगर गृह निर्माण सहकारी समिति ने जिस समय जमीन पर पट्टे बांट दिए

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Sunil Sharma

Jul 24, 2017

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आगरा रोड पर कानोता के पास दयाल नगर आवासीय कॉलोनी सृजित करने वाले भू—कारोबारियों ने पहले तो भूखंड बेच चांदी कूटी और जब कब्जा सौंपने का वक्त आया तो पीछे हट गए। आशियाने बनाने की उम्मीद में वहां पहुंच रहे लोग कब्जा नहीं मिलने से मायूस लौट आते हैं।

यहां लक्ष्मी नगर गृह निर्माण सहकारी समिति ने कृषि भूमि पर ही योजना सृजित कर पट्टे भी गलत (फर्जी) तरीके से जारी कर दिए। बड़ी संख्या में प्रभावित अब दर—दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं और भू—कारोबारी लोगों के करोड़ों रुपए लेकर भाग गए हैं।

खेल ऐसा: जमीन नहीं थी, फिर भी सृजित कर दी योजना
लक्ष्मी नगर गृह निर्माण सहकारी समिति ने जिस समय जमीन पर पट्टे बांट दिए, उस समय तक तो मालिकाना हक तो किसी और का ही था। समिति ने वर्ष 2012 में पट्टे जारी करना शुरू किया, जबकि जिनसे जमीन खरीदी गई उसकी रजिस्ट्री ही वर्ष 2015 में कराई गई।

आवासीय योजना गैर कृषि भूमि पर ही सृजित की जा सकती है। इससे लोगों को अनभिज्ञ रखा गया। जिस जमीन पर भूखंड सृजित किए, उस पर तो कब्जा ही किसी और का है। इसकी जानकारी समिति को पहले से ही थी। 300 भूखंडों की योजना में 30 पट्टे सृजित कर बाकी को रोक दिया। जबकि, 100 से ज्यादा भूखंड बेचान के लिए लोगों से एग्रीमेंट कर लिया। अब ऐसे लोगों को भी कब्जा देना तो दूर पट्टे तक नहीं दिए गए।

कोई मदद को तैयार नहीं : प्रभावितों ने जेडीए से लेकर सहकारिता विभाग तक गुहार लगाई। किसी ने भी लोगों को राहत नहीं दी। बल्कि, भूकारोबारी व सहकारी समिति से जुड़े पदाधिकारियों पर अप्रत्यक्ष तौर पर मेहरबानी करते रहे।

केस 1
ईंट—भट्टों में काम कर रहे महेश कुमार ने भूखंड संख्या 84 खरीदा। जब पहुंचा तो भूखंड था ही नहीं। पता किया तो खाली जगह बताई गई और फिर कब्जा लेने पहुंचा तो जमीन पर काबिज दूसरे लोगों ने भगा दिया।

केस 2

राजेश गुर्जर ने मकान बनाने और निवेश के लिए 4 भूखंड खरीदे। जब मौके पर पहुंचे तो कब्जा दिलाने वाला कोई नहीं मिला। काश्तकार घुसने नहीं दे रहे। अब मंत्री से गुहार की है।

केस 3
दीपक गनेरिवाल को पहले दो वर्ष तक तो पट्टा नहीं दिया। मामला पुलिस तक पहुंचा तो पट्टा मिला, लेकिन अब जमीन नहीं है। कानोता थाने में जानकारी भी दी पर हुआ कुछ नही।