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ब्रेकिंग : बिजली चोरी के आरोपी पर्यावरण अधिकारी पुलिस को चकमा देकर भागने में नाकाम, गिरफ्तारी के बाद अफसर करने लगे छुड़ाने का प्रयास

बिजली चोरी के मामले में चक्रधर नगर पुलिस ने पर्यावरण अधिकारी समरजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। जिनके खिलाफ कोर्ट ने पूर्व में स्थायी वारंट जारी किया है

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बिजली चोरी के मामले में चक्रधर नगर पुलिस ने पर्यावरण अधिकारी समरजीत सिंह को गिरफ्तार किया

बिजली चोरी के मामले में चक्रधर नगर पुलिस ने पर्यावरण अधिकारी समरजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। जिनके खिलाफ कोर्ट ने पूर्व में स्थायी वारंट जारी किया है

रायगढ़. बिजली चोरी के मामले में चक्रधर नगर पुलिस ने पर्यावरण अधिकारी समरजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। जिनके खिलाफ कोर्ट ने पूर्व में स्थायी वारंट जारी किया है। खास बात यह है कि जब पुलिस उक्त अधिकारी को गिरफ्तार करने पहुंची तब वह भागने का प्रयास कर रहे थे।

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वह पुलिस के जवानों को चकमा देेकर भागने की फिराक में थे। लेकिन जवानों ने उनकी इस चालाकी को भांप लिया और धर दबोचा। पर्यावरण अधिकारी के गिरफ्तारी की खबर जैसे ही जिले के अन्य रसूखदार अफसरों के बीच पहुंची। मामले को रफा-दफा करने का प्रयास शुरू हो गया।

प्रशासनिक अधिकारियों के फोन, चक्रधर नगर पुलिस के पास आने लगे। हलांकि स्थायी वारंट का हवाला देते हुए पुलिस अधिकारी ने किसी की नहीं सुनी और कानूनी कार्रवाई कर डाली। बहरहाल इस हाई प्रोफाईल केस में ड्रामा अब भी चालू है।

चक्रधर नगर पुलिस ने शनिवार को रायगढ़ के पर्यावरण अधिकारी समरजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। जिनके खिलाफ वर्ष 2015 में शहर के विनोवा नगर स्थित एलआईजी-45 में निवास के दौरान बिजली चोरी का आरोप है। जिसके खिलाफ धारा 135 के तहत प्रकरण भी बनाया गया है।

पर इस मामले में पर्यावरण अधिकारी ने कोई ध्यान नहीं दिया। पुलिस की माने तो इस मामले में पर्यावरण अधिकारी को कई बार सम्मन भी जारी हो चुका है। पर उन्होंने बिजली चोरी के इस प्रकरण में कोई ध्यान नहीं दिया। जिसकी वजह से कोर्ट की ओर से पर्यावरण अधिकारी सिंह के खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया गया है।

शनिवार को वारंट तामिली को लेकर जब चक्रधर नगर पुलिस के जवान, पर्यावरण अधिकारी को गिरफ्तार करने उनके आफिस पहुंंचे तो वे पुलिस जवानों का चकमा देकर भागने की तैयारी में थे। इस बात की पुष्टि खुद पुलिस के जवान कर रहे हैं।

जो उन्हें वारंट तामिली के तहत पकडऩे गए थे। पुलिस के अधिकारी भी इस बात का ेकह रहे है कि पर्यावरण अधिकारी ने दर्ज प्रकरण को गंभीरता से नहीं लिया। वही कोर्ट में पेशी को लेकर टाल-मटोल करते रहे। जिसके बाद वारंट जारी हुआ है। जबकि आरोपों से घिरे पर्यावरण अधिकारी की माने तो उन्हें इस मामले को कोई जानकारी नहीं है। इससे पहले कोई सम्मन भी नहीं मिला है। हलांकि पुलिस के अधिकारी इन बातों को मानने से इंकार कर रहे हैं।

प्रशासनिक अधिकारी बना रहे थे दबाव- पर्यावरण अधिकारी को जब पुलिस पकड़ कर थाने ले आई तो उन्होंने अपने आला अधिकारी के साथ कई प्रशासनिक अधिकारियों से फोन कर मामले की जानकारी दी। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी, पर्यावरण अधिकारी को छोडऩे के लिए दबाव बनाने लगे।

मीडिया की मौजूदगी के बीच कई प्रशासनिक अधिकारियों के फोन टीआई के शासकीय मोबाईल नंबर पर आने लगे। पर टीआई ने कोर्ट के स्थायी वारंट का हवाला देते हुए किसी प्रशासनिक अधिकारी की बात को अनसुना कर दिया। इस बीच पकड़े गए अधिकारी, खुद को पहुंच का भी कई बार हवाला दिया।