CM भूपेश ने केंद्रीय वित्त मंत्री को लिखा पत्र, कहा - कृषि सेस से छत्तीसगढ़ को 1000 करोड़ का नुकसान

- केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा
- छत्तीसगढ़ को एक्साइज ड्यूटी के रूप में मिलने वाली राशि पहले की तरह देने का अनुरोध

By: Ashish Gupta

Published: 17 Feb 2021, 11:49 AM IST

रायपुर. केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। जीएसटी भुगतान, बारदानों की कमी और राजीव गांधी न्याय योजना के बाद कृषि अधोसंरचना विकास सेस को लेकर केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने है। केंद्रीय बजट (Union Budget) के बाद कृषि सेस का खुलकर विरोध करने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Chhattisgarh CM Bhupesh Baghel) ने अब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Union Finance Minister Nirmala Sitharaman) को पत्र लिखकर केंद्र के इस फैसले पर असंतोष जताया है।

उनका कहना है कि कृषि सेस लगने से एक्साइज ड्यूटी कम होगी और इससे राज्य को 900 से 1000 करोड़ रुपए तक का नुकसान होगा। इससे राज्य के नागरिकों के हितों संचालित लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों पर विपरीत असर होगा। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से अनुरोध किया है कि एक्साइज ड्यूटी के रूप में मिलने वाली राशि को पूर्ववत जारी रखा जाए।

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कोरोना से 30 फीसदी राजस्व की कमी
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि- वर्ष 2020-21 कोविड महामारी के दुष्प्रभावों के कारण वित्तीय दृष्टि से अत्यंत कठिन वर्ष रहा है। इस वर्ष राज्य में सभी आर्थिक गतिविधियों पर विपरीत प्रभाव पडऩे के कारण स्वयं के वित्तीय स्रोतों में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आना संभावित है।

यह है कृषि सेस
वर्ष 2021-22 के केंद्रीय बजट में पेट्रोलियम पदार्थों, सोने-चांदी एवं अन्य अनेक वस्तुओं पर एक्साइज ड्यूटी में कमी की गई है। इसके स्थान पर कृषि अधोसंरचना विकास सेस लगाया है। एक्साइज ड्यूटी से राज्यों को भी राजस्व की प्राप्ति होती थी, जबकि कृषि सेस से केवल केंद्र सरकार को राजस्व मिलेगा। केंद्र इस राशि का उपयोग कृषि कल्याण के लिए करेगी। जानकारों के मुताबिक 2 से 4 फीसदी तक कृषि सेस लगाने की घोषिणा हुई है।

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जीएसटी और चावल का मुद्दा भी उठाया
मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी लिखा कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्य की जीएसटी क्षतिपूर्ति मद में केन्द्र सरकार से अभी भी 3700 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त होना शेष है। केन्द्र सरकार द्वारा पूर्व में राज्य से 60 लाख टन चावल लेने की घोषणा के बाद राज्य के चावल के कोटे में 16 लाख टन की कटौती कर दी गई है, जिसके कारण भी राज्य द्वारा संग्रहित अतिरिक्त धान के निराकरण में बड़ी हानि होना संभावित है।

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