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छत्तीसगढ़ के दो विधानसभा चुनाव में 183 दागी उम्मीदवारों ने ठोकी थी ताल

नैतिकता की दुहाई देने वाली पार्टियां जीत हासिल करने के लिए दागियों को भी टिकट देने से कोई गुरेज नहीं करती है। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव का इतिहास भी इससे अछूता नहीं रहा है।

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Chhattisgarh Assembly Elections

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव: महज 9 प्रतिशत टिकट ही महिलाओं को दिए जाते हैं

राहुल जैन/रायपुर. छत्तीसगढ़ में सियासत की चुनावी खिचड़ी पकने का दौर शुरू हो गया है। शह-मत के इस खेल में नैतिकता की दुहाई देने वाली पार्टियां जीत हासिल करने के लिए दागियों को भी टिकट देने से कोई गुरेज नहीं करती है। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव का इतिहास भी इससे अछूता नहीं रहा है। वर्ष 2008 और 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में 183 दागी उम्मीदवारों को टिकट दी गई थी। इसमें आपराधिक और गंभीर आपराधिक वाले उम्मीदवार शामिल हैं।

टिकट वितरण के पहले हर बार स्वच्छ छवि की बात करने वाली राजनीतिक पार्टियां अपने ही बनाए नियमों को आसानी से तोड़ देती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण चुनाव में उम्मीदवारों द्वारा दिए जाने वाले शपथ पत्र मिलता है। प्रदेश में 2008 विधानसभा चुनाव की बात करें, तो राजनीतिक दलों ने 77 ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जिनके खिलाफ पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसमें 39 उम्मीदवार ऐसे थे, जिनके खिलाफ अलग-अलग पुलिस थानों में गंभीर किस्म के जुर्म दर्ज थे। उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या की कोशिश, अपहरण, सांप्रदायिकता विद्वेष फैलाने, कुटरचित दस्तावेज तैयार करने जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं।

गंभीर आपराधिक मामलों में बड़े नेताओं के भी नाम
गंभीर आपराधिक मामलों में कांग्रेस-भाजपा दोनों दल के बड़े नेताओं के नाम भी शामिल हैं। इसमें कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी से लेकर वर्तमान वन मंत्री महेश गागड़ा भी शामिल थे।

2013 में बढ़ गई संख्या
दागी उम्मीदवारों को लेकर हर बार अच्छी खासी बहस छिड़ती है। चुनाव के पहले तक सभी दल दागियों को टिकट देने के विरोध में रहते हैं, लेकिन चुनाव के समय यह बात भूल जाते हैं। प्रदेश में इसका बड़ा उदाहरण मौजूद है। 2013 के विधानसभा चुनाव में कुल 106 दागियों को टिकट दी गई।2008 की तुलना में 29 अधिक थी।

कांग्रेस ने तोड़ा भाजपा का रिकॉर्ड
दागियों को टिकट बांटने के मामले में कांग्रेस ने भाजपा का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 18 और कांग्रेस ने 9 दागी उम्मीदवारों को टिकट दिया था। ठीक इसके वितपरी 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 15 और भाजपा ने 13 बागी उम्मीदवारों पर अपना भरोसा जताया था।

जनता भी दे रही आशीर्वाद
दागी उम्मीदवारों को जनता भी जीत का आशीर्वाद दे रही है। विधानसभा में अजीत जोगी और महेश गागड़ा दोनों ने जीत हासिल की है। 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के 6 और कांग्रेस के 5 दागी विधायकों ने जीत हासिल की थी। इसी प्रकार 2013 के विधानसभा चुनाव में कुल 14 दागी उम्मीदवार जीत थे। इनमें 8 कांग्रेस और 6 भाजपा के उम्मीदवार थे।

टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इस बार दागी उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया जाएगा।

टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने साफ-सुथरी छवि वाले प्रत्याशियों को टिकट वितरण में प्राथमिकता का वादा किया है।