
यहां नाबालिग लड़कियों को चढ़ा प्यार का रंग, ये आंकड़ें डरा देंगे आपको
रायपुर। राजधानी में घर छोडकऱ जाने वाले नाबालिगों में बालिकाओं की संख्या बालकों से दोगुनी है। रोज किसी न किसी इलाके में नाबालिग के लापता या गायब होने का मामला सामने आ रहा है। गायब होने वाले नाबालिगों को ढूंढने के लिए पुलिस अलग-अलग नाम से विशेष अभियान चलाती है। इसके बावजूद नाबालिगों के गायब होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले तीन साल में करीब दो सौ नाबालिग ऐसे हैं, जो अब तक लापता हैं। उनका पता नहीं चल पाया हैं। वे जीवित हैं या नहीं है? इसकी जानकारी न पुलिस के पास है और न ही परिजनों को पता है।
लापता में बालिकाएं ज्यादा
शहर और आसपास के इलाकों से सबसे ज्यादा बालिकाएं लापता हो रही हैं। अधिकांश मामले प्रेम-प्रसंग के सामने आ रहे हैं, जिसमें प्रेमी उन्हें बहला-फुसला कर अपने साथ ले जाते हैं। वर्ष 2017 में 171 बालक और 302 बालिकाएं गायब हुईं। वर्ष 2018 में बालक 126 और बालिकाएं 342, वर्ष 2019 में जून माह तक 219 बालिकाएं गायब हो चुकी हैं। इसके मुकाबले 50 बालक लापता हुए हैं।
परिजनों की अनदेखी
नाबालिगों के घर छोडऩे के कई कारण सामने आएं हैं, जिनमें ऐशोआराम की जिंदगी जीने की ललक, प्रेम प्रसंग, ज्यादा पैसा कमाने का लालच, महंगे शौक, मानव तस्करी आदि शामिल हैं। गायब होने वाले नाबालिगों की उम्र 15 से 17 के बीच ज्यादा है। ज्यादातर मामलों में नाबालिगों की परवरिश में परिजनों की अनदेखी बड़ी वजह है।
1018 को ढूंढ निकाला
गायब होने वाले नाबालिगों को ढूंढने के लिए पुलिस हर साल विशेष अभियान चलाती है। अभियान साल भर में दो बार चलाना होता है। पहले ऑपरेशन मुस्कान शुरू किया गया था। इसके बाद ऑपरेशन तलाश शुरू किया गया। करीब तीन माह पहले ऑपरेशन तलाश-3 चलाया गया था। पिछले तीन साल में कुल 1210 नाबालिग बालक-बालिकाएं अपने घर में सूचना दिए बगैर गायब हुए थे। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू की। पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर 1018 नाबालिगों को ढूंढ निकाला है।
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192 का पता नहीं चला
विभिन्न इलाकों से गायब हुए 192 नाबालिगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इनमें 43 बालक और 149 बालिकाएं हैं। नाबालिगों के लापता होने के मामले में पुलिस अपहरण का अपराध करती है। करीब चार साल पहले पुलिस ऐसे मामलों में अपराध दर्ज नहीं करती थी। केवल गुम इंसान का मामला दर्ज होता था।
अभियान में तेजी नहीं
ऑपरेशन तलाश के दौरान हर थाने के स्टॉफ को शामिल करके एक टीम बनाई जाती थी। यह टीम गायब नाबालिग की तलाश में दूसरे राज्य जाती थी। इस बार अभियान में तेजी नजर नहीं आई। थानों की टीम को शामिल नहीं किया गया। गुम इंसान सेल के कर्मचारी ही इसमें शामिल रहे।
पुलिस हर साल दो बार विशेष अभियान चलाकर नाबालिगों की तलाश करती है। इस वर्ष भी चलाया गया है। कई नाबालिगों को ढूंढा गया है। यह अभियान और चलाया जाएगा, ताकि बाकी के गायब नाबालिगों को भी ढूंढा जा सके।
-आरिफ शेख, एसएसपी, रायपुर
Updated on:
12 Jul 2019, 10:07 PM IST
Published on:
12 Jul 2019, 9:52 PM IST
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