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वीडियो स्टोरीः 800 साल पुरानी परंपराः माता मावली मंदिर की ढाई परिक्रमा के साथ शुरू

नक्सल प्रभावित जिले नारायणपुर अपनी भारी वन संपदा और नैसर्गिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। अपनी संस्कृति को जिंदा रखने के लिए यहां हर साल ऐतिहासिक मावली मेला भी आयोजित होता है। 800 साल पुरानी यह प्रथा इस साल भी माता मावली मंदिर की ढाई परिक्रमा करने के साथ शुरू हुई। यह मेला 19 फरवरी तक चलेगा।

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रायपुर। नक्सल प्रभावित जिले नारायणपुर अपनी भारी वन संपदा और नैसर्गिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। अपनी संस्कृति को जिंदा रखने के लिए यहां हर साल ऐतिहासिक मावली मेला भी आयोजित होता है। 800 साल पुरानी यह प्रथा इस साल भी माता मावली मंदिर की ढाई परिक्रमा करने के साथ शुरू हुई। यह मेला 19 फरवरी तक चलेगा। मेले के शुभारंभ के दौरान रस्म अदायगी में देवी-देवता और आंगादेव के साथ-साथ क्षेत्र के सभी पुजारी भी बड़ी संख्या में माता मावली के परघाव रस्म अदायगी में शामिल हुए और माता मावली का आशीर्वाद लिया। जानकारी के अनुसार बस्तर में नारायणपुर मेला एक ऐसा उत्सव है जो छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों की कई अलग अलग झलक देखने को मिलती है। नारायणपुर माता मावली मेला बस्तर के साथ साथ पूरे छत्तीसगढ़ विश्व प्रसिद्व मेला माना जाता है। मड़ई में अंचल के आदिवासियों की लोक कला और संस्कृति पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों की झलक देखने को मिलती है। यह मेला संस्कृति और परम्पराओं का हिस्सा है जो सदियों से चलता आ रहा है। माता मावली मेला में लगभग 84 परगना के देवी देवता शामिल होते है जिसके बाद मावली मंदिर के पास पिपल पेड़ के नीचे नगाड़ों थाप पर अपना शक्ति प्रदर्शन करते है। माता मावली मेला में 84 परगना के पधारे देवी देवता माता मावली मंदिर से आंगा, डोली, छत्र, झंडा आदि लेकर मार्ग में परम्परा और रीति रिवाज से नाच गान करते हुए पूरे मेला में परिक्रमा करते है।