
वैक्सीन कंपनी का परमानेंट सप्लायर बनाने का झांसा देकर 95 लाख ठगे
रायपुर. पुलिस के मुताबिक श्रवण कुमार पाठक फार्मा केमिकल (pharma chemical) बनाने वाली कंपनी में सीईओ की तरह कार्यरत हैं। 8 नवंबर 2021 को एक युवती लिलियन मोर्गन ने उन्हें वाट्सएप मैसेज किया। उसने खुद को जानवरों की वैक्सीन (vaccine) बनाने वाली कनाडा की एसीआईसी फार्मास्यूटिकल कंपनी का रिप्रेजेंटेटिव बताया। कुछ दिनों के बीच सामान्य बातचीत हुई। इसके बाद युवती ने कहा कि उनकी कंपनी को जिडॉन क्लोराइड एक्सट्रेक्ट की जरूरत है।
पहले यह केमिकल (chemical) चाइना (china) से मंगवाते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते वहां से अनुबंध खत्म कर दिया गया है। इसलिए उन्हें भारत में सप्लायर की तलाश है। माल सप्लाई करने से पहले 3 लीटर केमिकल सैंपल के लिए भेजना होगा। अगर यह सैंपल कंपनी की ओर से अप्रूव हो गया, तो आपको भारत में 5 साल के लिए केमिकल का स्थायी सप्लायर बना दिया जाएगा। श्रवणकुमार ने यह बात अपने कंपनी के रीतेश व अन्य को बताई। इसके बातचीत आगे बढ़ी। युवती ने कंपनी की ओर से कई ईमेल भेजकर कंपनी की जानकारी दी। दूसरी ओर से श्रवणकुमार और रितेश ने कनाडा की कंपनी के संंबंध में सारी जानकारी जुटाई। कंपनी सही पाई गई।
अब श्रीवण कुमार रितेश ने भारत में जिडॉन क्लोराइड एक्सट्रेक्ट सप्लाई करने वाली कंपनी की तलाश शुरू की। इस बीच कथित कनाडा वाली युवती लिलियन ने उन्हें मुंबई के सागर इंटरप्राइजेस की अरुणा सिंह नाम की युवती का नंबर दिया और बताया कि ये कंपनी केमिकल (chemical) की सप्लाई करती है। इसके बाद पीडि़तों ने अरुणा से संपर्क किया। अरुणा से 3 लीटर केमिकल लेकर पीडि़तों ने दिल्ली में कनाडा की कंपनी की ओर से भेजे गए रिप्रेजेंटेटिव को दे दिया। इसके अगले दिन लिलियन ने फिर ईमेल के जरिए सैंपल को अप्रूव होना बताया और 400 लीटर केमिकल सप्लाई करने का आर्डर दिया, लेकिन इसके साथ ही एक शर्त यह रख दी कि पहले 100 लीटर का स्टॉक दिखाना होगा। इस शर्त के चलते पीडि़तों ने फिर अरुणा से संपर्क किया और उन्हें 100 लीटर केमिकल खरीदने का आर्डर दिया। अरुणा ने उनसे 100 लीटर केमिकल की सप्लाई करने से पहले एडवांस में भुगतान करने कहा। इसके बाद चार किस्तों में कुल 95 लाख रुपए का भुगतान कर दिया।
कई लोगों को ठग चुका, पासपोर्ट है जब्त
अरुणा का मोबाइल बंद होने के बाद पीडि़त दिल्ली पहुंचे और कंपनी की ओर से सैंपल लेने आए नाइजीरियन की तलाश की। इस दौरान उन्होंने दिल्ली पुलिस से भी संपर्क किया। तब खुलासा हुआ कि सैंपल लेने आए नाइजीरियन का पासपोर्ट पहले से जब्त है। वह कई बार इस तरह की ठगी कर चुका है।
वाट्सएप में दिखाया, सुरक्षा गार्ड ले जाएंगे बताया
केमिकल लेने के लिए एडवांस में पहले 30 लाख रुपए दिए। इसके बाद रितेश जब मुंबई गए, तो अरुणा ने रास्ते में ही उन्हें वाट्सएप में एक वाहन में लोड केमिकल का फोटो दिखाया और बताया कि इसे हमारे सुरक्षा गार्ड अपनी कस्टडी में आप तक पहुंचाएगा। बाकी के भुगतान जल्द कर दीजिए। पीडि़त ने भरोसा करके बाकी के पूरे 95 लाख आरोपियों कसे बताए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद अरुणा का मोबाइल नंबर बंद हो गया। दूसरी ओर लिलियन का भी नंबर बंद हो गया। इसके बाद पीडि़तों को ठगी का एहसास हुआ।
जमा होते ही हुआ आहरण, जांच में जुटी पुलिस
आरोपियों ने पीडि़तों से अपने आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी और यस बैंक के खातों में रकम जमा करवाया। खाते बिहार, झारखंड के बताए जा रहे हैं और जैसे ही इन खातों में रकम आया, वैसे ही चेक और नकद विड्राल होता गया। इन खातों में एक भी पैसा नहीं बचा है। फिलहाल राजेंद्र नगर पुलिस आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
Published on:
05 Mar 2022 01:52 am

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