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गुरु तीर्थ वंदना के साक्षी बने संपूर्ण छत्तीसगढ़ के जैन समाज

गुरु आचार्य श्रीविशुद्ध सागर महराज व मुनि संघ के अगवानी के लिए शिवनाथ नदी के तट किनारे मुनि श्रीसुयश सागर सद् भाव सागर व श्रुत सागरजी महराज, सिमगा जैन समाज सहित भाटापारा, तिल्दा, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजिम के भक्त व अन्य समाज के हजारों लोगों ने उमड़ पड़े। आचार्य श्री व मुनिराजों का हर्षोल्लास के साथ ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते अगवानी की गई।

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गुरु तीर्थ वंदना के साक्षी बने संपूर्ण छत्तीसगढ़ के जैन समाज

गुरु तीर्थ वंदना के साक्षी बने संपूर्ण छत्तीसगढ़ के जैन समाज

नवापारा-राजिम। श्रीदिगम्बर जैन पंचायत कमेटी नवापारा के चातुर्मास कमेटी के मुख्य संयोजक डॉ. राजेन्द्र गदिया व संरक्षक रमेश पहाडिय़ा के सानिध्य में श्रद्धालुओं का जत्था गुरुवार को प्रात: 7 बजे सिमगा पहुंचा। जहां शिवनाथ नदी के तट पर श्रमण रत्न मुनि सुयश सागरजी महाराज, मुनि सद्भाव सागरजी महाराज व क्षुल्लक श्रीश्रुत सागरजी ने अपने गुरु आचार्य विशुद्ध सागर महाराज व समस्त संघ की आगवानी की तथा गुरु तीर्थ वंदना का सौभाग्य प्रात: 9 बजे हुआ। इस ऐतिहासिक पलों के साक्षी बनने का सौभाग्य समस्त छत्तीसगढ़ से पधारे श्रद्धालुजनों को प्राप्त हुआ। आगवानी करते हुए सुयश सागरजी महाराज ससंघ ने अपने गुरु को उच्चासन पर विराजित कर गर्म जल से पाद प्रक्षालन किया, शास्त्र भेंट कर आचार्य भक्ति की। गुरु ने भी अपने शिष्य संघ को आशीर्वाद प्रदान किया। इस दौरान गुरु-शिष्य दोनों के श्रीमुख देखकर लग रहा था जितनी प्रसन्नता शिष्य को गुरु दर्शन कर मिल रही थी, उतना ही गर्व गुरु को अपने शिष्य की प्रभावना को देखकर हो रहा था। इसके बाद समस्त आचार्य संघ मंदिरजी की ओर भव्य शोभायात्रा के साथ विहार किए।
1984 में त्रिवेणी संगम में था गुरु-शिष्य मिलन : प्रकाश मोदी
छग जैन समाज के अध्यक्ष प्रकाश मोदी ने बताया कि ऐसे गुरु-शिष्य का मिलन छत्तीसगढ़ में पहली बार हो रहा है। इसके पूर्व अविभाजित मध्यप्रदेश के समय 1984 मे आचार्य विधा सागर महराज व पुष्प दंत सागर महराज का मिलन जिसे गुरु तीर्थ वंदना भी कहा जाता है का मिलन राजिम के त्रिवेणी संगम पुल पर हुआ था और उस समय हजारों लोग इसके साक्षी थे।
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आचार्य विशुद्ध सागर व मुनि संघ के अगवानी में उमडा़ जन सैलाब
मेरे गुरुवर तो मेरे मन मंदिर में विराजते हैं : मुनि सुयश सागर
सिमगा। गुरु आचार्य श्रीविशुद्ध सागर महराज व मुनि संघ के अगवानी के लिए शिवनाथ नदी के तट किनारे मुनि श्रीसुयश सागर सद् भाव सागर व श्रुत सागरजी महराज, सिमगा जैन समाज सहित भाटापारा, तिल्दा, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजिम के भक्त व अन्य समाज के हजारों लोगों ने उमड़ पड़े। आचार्य श्री व मुनिराजों का हर्षोल्लास के साथ ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते अगवानी की गई।
इस अवसर पर मुनि श्री सुयश सागर, सद्भाव सागर, छुल्लक श्रुत सागरजी महराज ने आचार्य श्री के पादप्रक्षालन किया। नगर में लोगों ने जगह-जगह आचार्य श्री व मुनिराजों के पादप्रक्षालन किया। गुरु-शिष्य महामिलन के अवसर पर मुनि सुयश सागर ने संबोधित करते हुए कहा कि हम अपने गुरु से कभी दूर थे ही नहीं, तो मिलन कैसा। मेरे गुरुवर तो मेरे मन मंदिर में विराजते हैं। आचार्यश्री हम से भले ही शरीर से दूर थे, लेकिन हमारी आत्मा से गुरुवर के पास रहती है। वहीं, आचार्य श्री विशुद्ध सागर महराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि गुरु और शिष्य का रिश्ता समर्पण पर टिका होता है। शिष्य के लिए गुरु साक्षात भगवान के बराबर होता है। गुरु सर्वदा अपने शिष्य का हित ही करता है। गुरु के कहे वचनों का पूर्ण श्रद्धा से पालन करने वाला शिष्य का कल्याण होने से कोई नहीं रोक सकता। कार्यक्रम में हजारों लोगों उपस्थित हुए।

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