
मरीज की आंखों में देख लेने से नहीं, संपर्क में आने से होता है आई फ्लू, आंख में दवाएं नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श के बाद ही डालें
नवापारा राजिम। कंजंंक्टीवाइटिस होने पर आंखों का लाल हो जाना, पलकों का सूजना, हल्का सिर दर्द, आंखों से पानी आना, अंांखों से सफेद कचरा, डिस्चार्ज आना, पलकों का चिपक जाना इत्यादि की शिकायतें मरीज करते हैं। संक्रमण के कारण होने वाली कंजंक्टिवाइटिस सामान्य सर्दी, बुखार, खांसी के साथ या बाद में भी हो सकती है। एलर्जी के कारण होने वाली कंजंक्टिवाइटिस में मुख्य कारण पराग कण धूल से दवाओं से एलर्जी हो जाना होता है। इसमें मरीज आंखों में सूजन, लालिमा, खुजलाहट, पानी आना, जलन की शिकायत करते हैं। आंखों में बाहरी कण चले जाने, चोट लगने के कारण भी कंजंक्टिवाइटिस हो जाती है, जिसके कारण आंख लाल होना, पानी आना, दर्द होना आम लक्षण हैं। एलर्जी के कारण होने वाली कंजंक्टिवाइटिस का इलाज के कारण का निदान करने से ही हो जाता है। यदि किसी दवा के कारण एलर्जी हो गई हो तो उस दवा को बंद कर एलर्जी प्रतिरोधक दवा लेने से ठीक हो जाती है।
आम बात है संक्रमण के कारण कंजंक्टिवाइटिस होना
आंख में कचरा जाने, चोट लगने के कारण होने वाली कंजंक्टिवाइटिस कण निकालने, चोट के ठीक होने पर ही ठीक हो सकती है। संक्रमण के कारण होने वाली कंजंक्टिवाइटिस सबसे आम है। यह बरसात में स्कूल के बच्चों में, ऑफिस में, हॉस्टल में निकट सम्पर्क के कारण सामूहिक रूप से प्रभावि करती है। डॉ. तेजेन्द्र साहू ने कहा कंजंक्टिवाइटिस से बचने के लिए आवश्यक है कि मरीज के सम्पर्क से यथासम्भव बचा जावे। यदि फिर भी कंजंक्टिवाइटिस के प्रकोप के शिकार हो जावे, तब रंगीन चश्मे का उपयोग करें, जिससे आंखों को आराम मिलेगा। अपना तौलिया, रूमाल, पेन इत्यादि व्यक्तिगत वस्तुएं अलग रखें। ऑफिस, शाला से अवकाश लेकर विश्राम करें, जिससे संक्रमण सहकर्मियों व दोस्तों में न फैल जावे। आंखों से पानी, डिस्चार्ज साफ रूमाल से साफ करें। आंखे बार बार साफ करें. हाथ साबुन से धोवें।
रोगी का चश्मा न लगावें
डॉ. तेजेन्द्र साहू ने कहा कंजंक्टिवाइटिस के फैलने के बारे में कुछ भ्रांतियां हैं। जैसे कि पहले यह माना जाता था यह मरीज की आंखों में देख लेने से ही हो जाती है, जबकि वास्तविकता यह नहीं है। यह सिर्फ देखने से नहीं होता बल्कि किसी मरीज के निकट सम्पर्क में जाने से, स्पर्श, हाथ मिलाने, संक्रमित व्यक्ति की व्यक्तिगत वस्तुओं के उपयोग से हो सकता है। कंजंक्टिवाइटिस होने पर आंखों में लालिमा, दर्द, धुंधला दिखने पर नेत्र विशेषज्ञ से सम्पर्क करें। रोगी का चश्मा न लगावें। यथासम्भव रेल, बस इत्यादि साधनों से यात्रा न करें। स्विमिंग पुल में न जाए, सामूहिक कार्यक्रम में जाने से बचें. आंखों में सूरमा, काजल का प्रयोग न करें। कॉन्टेक्ट लेंस न लगाएं. आंखों को बार बार न रगड़े. मूवी, वीडियो गेम देखते रहने की बजाय आंखों को आराम दें. अपनी आंखों में कोई भी दवा किसी परामर्श के स्वयं ही न डालें। आंख में दवाएं नेत्र विशेषज्ञ से सम्पर्क तथा परामर्श के बाद ही डालनी चाहिए। आंखों में दवा डालने के पूर्व उसकी एक्सपायरी तारीख ठीक से देख लेवें, ताकि वह बाद में हानिकारक सिद्ध न हो.
आई फ्लू होने पर ये काम करें
आंखों को गुनगुने पानी से क्लीन करें। आंखों को साफ करने के लिए साफ और सूती कपड़े का इस्तेमाल करें. आई फ्लू को फैलने से रोकने के लिए पीडि़त व्यक्ति काला चश्मा पहनकर रखे. टीवी या मोबाइल देखने से बचें, आंखों को बार-बार छूने से बचें। आंखों को साफ करने के लिए गंदे कपड़े का इस्तेमाल न करें। आंखों को छूने के बाद साबुन से हाथ धोना न भूलें । प्रभावित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें। तौलिया या रूमाल न साझा करें। प्रभावित व्यक्ति को आंख छूने के बाद अन्य सामान छूने से रोकें। बाहर से आने के बाद आंख साफ पानी से धोएं। कोई भी लक्षण दिखने पर आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाए।
- डॉ. तेजेन्द्र साहू, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सामु. स्वा. केन्द्र गोबरा नवापारा
Published on:
27 Jul 2023 03:49 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
