
छत्तीसगढ़ में सत्ता पलटते ही इस्तीफे का दौर शुरू, निगम-मंडलों में इन्होंने सौंपा इस्तीफा
रायपुर. कांग्रेस को मिली एकतरफा जीत के बाद भाजपा के निगम-मंडलों में पदस्थ दिग्गज नेताओं की कुर्सी भी हिल गई है। नई सरकार के गठन के साथ अधिकांश नेताओं का जाना तय माना जा रहा है। कुछ दिग्गजों ने इस्तीफा देना शुरू कर दिया है। रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने अपनी टीम के साथ इस्तीफा दिया। वहीं अपेक्स बैंक के अध्यक्ष अशोक बजाज ने ई-मेल से अपना इस्तीफा भेज दिया है। गुरुवार को अधिकांश निगम-मंडलों के अध्यक्षों ने अपने कार्यालय पहुंचकर जरूरी सामान भी एकत्र करना शुरू कर दिया है।
संवैधानिक पदों पर मिल सकती है छूट
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है, जिन आयोगों में संवैधानिक पदों के तहत नियुक्ति हुई है, वहां कार्यकाल पूरा होने के बाद ही हटाया जा सकता है। शेष निगम-मंडलों की नियुक्ति को नई सरकार रद्द कर सकती है।
13 अध्यक्षों को कैबिनेट का दर्जा
भाजपा शासन में 13 निगम-मंडल के अध्यक्षों को कैबिनेट और 28 को राज्यमंत्री का दर्जा मिला हुआ था। कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने वालों में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्याम बैस, मिनरल डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष शिवरतन शर्मा, पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष देवजी भाई पटेल, स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड की अध्यक्ष लता उसेण्डी, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम अशरफी, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष संतोष बाफना, स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष युद्धवीर सिंह जूदेव, राज्य वनौषधि बोर्ड के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष चंद्रशेखर साहू, बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष खूबचंद पारख, अपेक्स बैंक के अध्यक्ष अशोक बजाज और राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष ज्योतिनंद दुबे का नाम शामिल हैं।
इन्हें राज्यमंत्री का दर्जा
कृष्ण राय, भूपेन्द्र सवन्नी, छगन लाल मूंदड़ा, नीलू शर्मा, सरला जैन, दीपक साहू, अमित जीवन, चंद्रभूषण शर्मा, मोहम्मद अकरम कुरैशी, भरत साय, पुरन्द्र मिश्रा, राधाकृषण प्रसाद गुप्ता, नरेश गुप्ता, सुरेन्द्र सिंह केम्बो, श्रीनिवास राव मद्दी, हर्षिता पाण्डेय, निर्मल सिन्हा, चन्द्रशेख पाण्डे, डॉ. विनय कुमार पाठक, सनम जांगड़े, चुन्नीलाल साहू, राजशरण भगत, भोजराज नाग और केदार गुप्ता।
कांग्रेस के सामने नेताओं को संतुष्ट करने की बड़ी चुनौती
कांग्रेस को मिली एकतरफा जीत से कांग्रेस की भी परेशानी बढ़ गई है। दरअसल, प्रदेश में विधानसभा सीटों के हिसाब से 13 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। वहीं 41 निगम-मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्ति मिल सकती है। जबकि कांग्रेस से 68 विधायक चुनाव जीत कर पहुंचे। इसमें कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता भी शामिल है।
वहीं जिन प्रमुख नेताओं को टिकट नहीं मिली है, उन्हें मलाइदार पद देने का आश्वासन भी दिया गया था। अब इन पदों पर नियुक्ति के लिए दावेदार अधिक हो गए हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने अपने विधायकों और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करना बड़ा चुनौती होगी।
Published on:
14 Dec 2018 02:12 pm

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