
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस को एक केस की जांच करने के लिए तीन माह से दफन शव को निकलवाना पड़ा। ग्रामीण की मौत के बाद परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। तीन माह बाद पुलिस जांच के लिए जब गांव पहुंची, तब इसका खुलासा हुआ। ऐसे में पुलिस ने मजिस्ट्रेट से अनुमति लेकर उनकी मौजूदगी में शव को कब्र खोदकर बाहर निकलवाकर पोस्टमॉर्टम कराया। मामला पचपेड़ी थाना क्षेत्र का है।
आमगांव निवासी रामकुमार जगत पिता किरता जगत (42) व अनिकेत कुमार नेताम पिता भागवत प्रसाद नेताम ग्राम सेमराडीह रिस्ते में दोनों मामा भांजा 26 मई को बाइक से रिश्तेदारी में कसडोल जा रहे थे। तभी जोंधरा तक्षशिला स्कूल के आगे पेट्रोल पंप के पास हाइवा ने अपनी चपेट में ले लिया, जिससे बाइक में सवार रामकुमार और अनिकेत को चोट आई।
रामकुमार को ज्यादा चोट आने से गंभीर स्थिति में बिलासपुर सिम्स रेफर किया गया था। वहीं अनिकेत को मामूली चोर्टें आइं। रामकुमार जगत की सिम्स के बाद बिलासपुर के प्राइवेट यूनिटी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। इलाज का पैसा जुटा पाने में असमर्थ रामकुमार के परिजन 2 जून वापस अपने घर ले आए। जिसके बाद रामकुमार की एक दिन बाद 3 जून को मौत हो गई। परिजनों ने मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया था। इधर मृतक के साथी ने घटना दिनांक को ही सड़क दुर्घटना की रिपोर्ट पचपेड़ी थाना में दर्ज कराई थी।
पचपेड़ी पुलिस धारा 279,337 के तहत अपराध दर्ज किया था। उसी संबंध में पचपेड़ी पुलिस जांच को आगे बढ़ाते हुए घायल व्यक्ति के बारे में जानकारी लेने उसके गृह ग्राम आमगांव पहुंची, जहां पुलिस को पता चला कि उक्त घायल व्यक्ति की 3 माह पहले ही मौत हो गई है और पुलिस को बगैर सूचना दिए अंतिम संस्कार कर दिया गया है।जिससे पचपेड़ी पुलिस मौत की वास्तविक कारण जानने मस्तूरी कार्यपालिक दंडाधिकारी मौके पर पहुंच मृतक के कब्र से लाश को निकलवा मौके पर ही डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया।
सड़क हादसे में घायल ग्रामीण की मौत के बाद बिना पोस्टमॉर्टम के शव दफनाने का मामला सामने आने के बाद TI मोहन भारद्वाज ने पुलिस अफसरों को जानकारी दी। फिर मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन देकर कब्र खोदकर शव निकलवाने की अनुमति मांगी। बुधवार को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कब्र खोदा गया और शव को निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया गया। इसके बाद परिजनों ने फिर से शव को उसी कब्र में दफ्न कर दिया।
हमे लगा वो ठीक हो गया है
इस मामले में TI मोहन भारद्वाज का कहना है कि जब परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराया था। उस समय युवक घायल था। हमने रिपोर्ट भी दर्ज किया था। घायल भी अस्पताल में भर्ती था। मगर जब बिना इलाज कराए परिजन घर ले गए और उसकी मौत हो गई, तो हमें सूचना देनी चाहिए थी। लेकिन उन्होंने सूचना नहीं थी। हमें लग रहा था वो ठीक हो गया, इलाज के बाद। अब हम जब बयान दर्ज करने पहुंचे, तब हमें मामले का पता चला है।
Published on:
23 Sept 2022 11:16 am
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