
तीन जिलों में करोड़ों का नुकसान(Photo-AI)
CG Dhan Kharidi Big Scam: छत्तीसगढ़, जिसे देश का धान का कटोरा कहा जाता है, वहां धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कवर्धा के बाद अब जांजगीर-चांपा और महासमुंद जिलों से भी करोड़ों रुपए के धान के गायब होने, सड़ने और चूहों द्वारा नष्ट किए जाने की चौंकाने वाली शिकायतें सामने आई हैं। यह पूरा मामला राज्य की खरीद, भंडारण और परिवहन प्रणाली में गहरे बैठे भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करता है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग के अनुसार कवर्धा जिले के दो संग्रहण केंद्रों में रखे गए धान को चूहों ने पूरी तरह नष्ट कर दिया। इस धान की कीमत करीब 7 करोड़ रुपए आंकी गई है। जांच में सामने आया कि उचित भंडारण व्यवस्था और निगरानी के अभाव में यह नुकसान हुआ।
जांजगीर-चांपा जिले में लापरवाही और गलत भंडारण के कारण लगभग 6 करोड़ रुपए का धान सड़ गया। अकलतरा विधायक राघवेंद्र सिंह ने दावा किया कि संग्रहण केंद्र में करीब 20 हजार क्विंटल धान पूरी तरह खराब हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नुकसान की भरपाई केवल कागजों में कर ली गई है और सड़े हुए धान को अब भूसे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
महासमुंद जिले से भी ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जहां 5.71 करोड़ रुपए मूल्य के धान को चूहों द्वारा नष्ट किए जाने जैसी स्थिति बन गई है। इससे साफ है कि समस्या किसी एक जिले तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैली हुई है।
राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित लिमिटेड (मार्कफेड) ने मामलों को लेकर नोटिस जारी करने, निलंबन और जांच की बात कही है। हालांकि प्रशासनिक दावों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर सुधार की तस्वीर धुंधली ही नजर आ रही है। किसानों की मेहनत और सरकारी खरीद प्रक्रिया के बीच फैला यह घपला नेटवर्क सुशासन और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पूरे मामले पर तंज कसते हुए कहा कि “असली चूहे तो सरकार में बैठे हुए हैं।” वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के चलते अलग-अलग जिलों में करीब 25 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
दूसरी ओर, मार्कफेड ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। मार्कफेड के एमडी जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि धान खरीदी और परिवहन में हुई लापरवाही की जांच जारी है, दोषियों पर विभागीय कार्रवाई की जा रही है, राइस मिलरों को ब्लैकलिस्ट किया गया है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
एक ओर किसान महीनों की मेहनत से धान उगाते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी तंत्र की लापरवाही और भ्रष्टाचार से करोड़ों का अनाज बर्बाद हो रहा है। सवाल यह है कि इस नुकसान की असली कीमत कौन चुकाएगा—सरकार, अफसर या फिर किसान?
Updated on:
17 Jan 2026 08:27 am
Published on:
17 Jan 2026 08:26 am
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