
रायपुर . केंद्र सरकार ने घरेलू विमान सेवा प्रदान करने वाली विमानन कंपनी एयर ओडिशा को रायपुर से सरगुजा और बस्तर रूट के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी है। विमानन विभाग के संयुक्त सचिव मुकेश बंसल ने शुक्रवार को बताया कि कंपनी ने खुली निविदा में इस रूट का अधिकार प्राप्त किया है। कंपनी के वरिष्ठ अफसरों ने राज्य सरकार के अफसरों से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि कंपनी ने छत्तीसगढ़ के लिए एक 19 सीटर विमान खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके यहां आते ही विमान सेवा शुरू हो जाएगी।
कंपनी का इरादा फिलहाल एक ही विमान से काम चलाने की है। यह दिन भर में एक बार रायपुर से अम्बिकापुर और एक बार रायपुर-जगदलपुर के बीच आवाजाही करेगा। यात्रियों की संख्या बढऩे के बाद विमानों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। अफसरों का कहना है कि इस सेवा के शुरू हो जाने से रायपुर से बस्तर अथवा सरगुजा की दूरी एक घंटे से भी कम हो जाएगी। इधर, राज्य सरकार ने दोनों हवाई पट्टियों को उड़ान के लिए लगभग तैयार कर लिया है। रनवे से लेकर लाउंज तक का निर्माण हो गया है। लाइसेंस के लिए भी वायुपत्तन प्राधिकरण के पास आवेदन किया जा चुका है। कहा जा रहा है, अनुमति जल्दी ही मिल जाएगी।
कंपनी के पास फिलहाल सेसना
एयर ओडिशा की वेबसाइट के मुताबिक कंपनी के पास फिलहाल ९ सीटों वाला सेसना विमान है। इसमें एक पायलट और दो क्रू सदस्य होते हैं। कंपनी भुवनेश्वर से राउरकेला, संबलपुर, झारसुगुड़ा और कोरापुट तक टैक्सी सेवा प्रदान करती है।
किराया अभी तय नहीं
कंपनी या सरकार ने किराए के बारे में अभी कुछ नहीं कहा है। लेकिन, रिजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत नागर विमानन मंत्रालय ने एक घंटे से कम की यात्रा के लिए 2500 रुपए तक किराए की बात कही है। एेसे में इससे अधिक की बात नहीं कही जा रही है। कंपनी की वेबसाइट पर भुवनेश्वर से राउरकेला तक एक व्यक्ति का किराया 2500 रुपए बताया गया है। यह दूरी करीब 237 किमी है। रायपुर से जगदलपुर ? की दूरी भी 245 किमी है। कहा जा रहा है किराए का एेसा ही ढांचा यहां भी हो सकता है।
10 गुना तक वसूलते हैं टिकट का किराया
संसद की एक स्थायी समिति ने केंद्र सरकार से विमान टिकट और टिकट रद्द (कैंसल) करने पर लगने वाले शुल्क की सीमा तय करने की सिफारिश की है। यह सिफारिश विमानन कंपनियों को लेकर उपभोक्ताओं की संतुष्टि में सुधार से संबंधित मुद्दों पर संसद की स्थायी समिति की 256वीं रपट में की गई है। रपट के अनुसार, समिति ने रेखांकित किया है कि त्योहारों और यात्रा तिथि के करीब की जाने वाली बुकिंग पर कुछ विमानन कंपनियां काफी पहले की बुकिंग के दौरान लिए जाने वाले किराए से 10 गुना अधिक किराया वसूलती हैं। 4 जनवरी को पेश की गई रपट के अनुसार, विकसित देशों द्वारा लागू किए गए मूल्य निर्धारण तंत्र भारत के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते हैं।
50 फीसदी कटे कैंसलेशन फी
समिति ने सिफारिश की है कि विमानन कंपनियों को टिकट रद्द कराने पर मूल किराए का केवल 50 फीसदी काटने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। टिकट रद्द कराने पर शुल्क और तेल अधिभार को वापस किया जाना चाहिए। विमानों के समय बदलने, टिकट रद्द करने और नो-शो के लिए एकसमान या न्यूनतम राशि तय होनी चाहिए।
Updated on:
07 Jan 2018 11:23 am
Published on:
06 Jan 2018 01:04 pm
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