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चंद्रखुरी जैसा ही माता कौशल्या का एक और मंदिर बनेगा, पाटेश्वरधाम में चल रही तैयारी

राजधानी से करीब 28 किमी दूर माता कौशल्या मंदिर (Mata Kaushalya Temple) की ख्याति फैल रही है। चंद्रखुरी में जिस तरह से धार्मिक पर्यटना और आस्था केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।

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चंद्रखुरी जैसा ही माता कौशल्या का एक और मंदिर बनेगा, पाटेश्वरधाम में चल रही तैयारी

रायपुर. राजधानी से करीब 28 किमी दूर माता कौशल्या मंदिर (Mata Kaushalya Temple) की ख्याति फैल रही है। चंद्रखुरी में जिस तरह से धार्मिक पर्यटना और आस्था केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। उसके बाद छत्तीसगढ़ के अन्य आश्रमों में माता कौशल्या मंदिर को आकार देने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए बाकायदा टोलियां बनाई हैं। उन्हें वाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से जोड़ा जा रहा है, ताकि मंदिर निर्माण के लिए धन संग्रम करने में दिक्कतें न आए।

भगवान राम के ननिहाल की मान्यता और माता कौशल्या की जन्मस्थली छत्तीसगढ़ है। इस रूप में प्रचार-प्रसार को तेजी से बढ़ाया जा रहा है बालोद के पाटेश्वर धाम के माध्यम से। इस आश्रम का संचालन बाल योगी रामबालक दास कर रहे हैं। इस आश्रम का एक कार्यालय शहर के सुंदरनगर में संचालित होने की बात कही गई है। विगत दिनों पीपरखार गांव में पाटेश्वर संस्कार वाहिनी द्वारा एक कलश यात्रा निकाली गई। इस आश्रम से गांव के लोग जुड़ रहे हैं और माता कौशल्या का मंदिर बनाने के लिए टोलियां बनाकर काम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

योगदान करने लोग आ रहे आगे
राम बालक दास ने भेजे संदेश में कहा है कि पाटेश्वर धाम में भव्य कौशल्या माता मंदिर का निर्माण होगा। इसके लिए लोग आगे आ रहे हैं। यह प्रांत मां कौशल्या की जन्मभूमि है। कोरोनाकाल में ऑनलाइन सत्संग के माध्यम से संत राम बालक दास लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान करने की बात कहते हैं। साथ ही मंदिर निर्माण के योगदान के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, ताकि चंद्रखुरी जैसा ही पाटेश्वर धाम में एक मंदिर का निर्माण संपन्न हो सके।

यहीं सीता रसोई के दर्शन
पाटेश्वर धाम के मुख्य गेट में प्रवेश करने पर दाहिने ओर सीता रसोई के दर्शन होते हैं। लोग बच्चों का जन्मदिन, सालगिरह, अपने माता-पिता की पुण्य स्मृतियों में यहां नि:शुल्क भोजन कराने का भी कार्यक्रम करते हैं। जहां मां कौशल्या का मंदिर बनेगा, वहीं प्रथम तल पर शिव परिवार के भी दर्शन होंगे। संत-महापुरुषों के तस्वीरों को भी आश्रम में स्थापित करने की योजना है। ताकि सभी धर्म के लोगों के लिए यह आश्रम आस्था का केंद्र बन सके।