
Ban on Padmavati in MP Punjab and Rajasthan
नई दिल्ली/रायपुर. फिल्म पद्मावती के रिलीज होने के पहले ही मध्यप्रदेश, पंजाब व राजस्थान में इसको बैन कर दिया गया है। वहीं, छत्तीसगढ़ में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने मुख्यमंत्री से प्रतिबंध लगाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म से कुछ आपत्तिजनक दृश्य हटाने को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सेंसर बोर्ड ने अभी फैसला नहीं लिया है। एेसे में इस मामले में दखल देना पक्षपातपूर्ण होगा।
प्रक्रिया में तेजी की मांग खारिज
मुंबई. फिल्म पद्मावती के सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया में तेजी लाने की फिल्म निर्माताओं की मांग को सेंसर बोर्ड ने खारिज कर दिया है। इधर, सेंसर बोर्ड के प्रमुख ने सोमवार को पणजी में कहा कि पद्मावती को लेकर चल रहा विवाद बहसबाजी से नहीं बल्कि आपसी बातचीत से ही हल होना चाहिए।
धमकियों पर सरकार चुप क्यों : श्याम बेनेगल
विवादों के बीच डायरेक्टर श्याम बेनेगल ने कहा कि डायरेक्टर्स और एक्टर्स को मिल रही धमकियों पर सरकार कोई एक्शन क्यों नहीं ले रही है। लोग खुलेआम सिर काटने की बात करते हैं और उसे लिए पैसे भी ऑफर कर रहे हैं और इसे रोकने के लिए राज्य सरकार कुछ नहीं कर रही? बेनेगल ने कहा, पद्मावती के मामले में सेंसर बोर्ड अजीब तरीके से बर्ताव कर रहा है।
ममता ने कहा, यह तो सुपर इमरजेंसी
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने फिल्म के विरोध को सुपर इमरजेंसी करार दिया है। ममता ने कहा-विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह विचारों की अभिव्यक्तिको रोकने की राजनीतिक दलों की नपी-तुली योजना है।
सिंहदेव बोले- फिल्म की प्री स्क्रीनिंग हो
विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता टीएस सिंहदेव ने मुख्यमंत्री रमन सिंह को पत्र लिखकर पद्मावती की प्री स्क्रीनिंग की मांग की है। सिंहदेव ने लिखा है, उन्होंने फिल्म नहीं देखी है, लेकिन क्षत्रीय समाज व जनभावनाओं को ध्यान में रखकर स्क्रीनिंग के बाद ही इसका प्रसारण किया जाए। सिंहदेव ने मुख्यमंत्री से खुद फिल्म देखकर निर्णय लेने की मांग की है। फिल्मों के साथ इस पर सार्वजनिक लेखों के प्रकाशन की अनुमति में भी जनभावनाओं का ख्याल रखने को कहा है।
सार्वजनिक न हों आपत्ति : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अभी यह मामला प्री-मैच्योर है। सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेट के लिए वैधानिक तौर पर काम करता है और फिल्म को लेकर वो ही विचार करेगा। कोर्ट इस मामले में दखल कैसे दे सकता है ? सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से कहा कि जो आपत्ति याचिका में दी गई हैं वो किसी अन्य काम के लिए इस्तेमाल नहीं होंगी और उसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निस्तारण किया।
Published on:
21 Nov 2017 12:29 pm
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