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Bhanupratappur By-Election: सत्ता की हनक या विपक्ष का तेवर, जानिए भानुप्रतापपुर सीट का चुनावी गणित…

Bhanupratappur By-Election: ब्रम्हानंद नेताम भानुप्रतापपुर से साल 2008 में विधायक रह चुके हैं। मनोज मंडावी को एक बार हरा चुके हैं। 2008 में नेताम को 41384 वोट मिले थे वहीँ उस वक्त के निर्दलीय प्रत्याशी मनोज मंडावी को 25905 वोट मिले थे। नेताम का नाम इस इलाके से चर्चा में है।

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Bhanupratappur By-Election: सत्ता की हनक या विपक्ष का तेवर, जानिए भानुप्रतापपुर सीट का चुनावी गणित...

Bhanupratappur By-Election

रायपुर/ कांकेर .Bhanupratappur By-Election: छत्तीसगढ़ में हो रहे भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव चर्चे में है। राजनितिक चिंतकों की मने तो आज तक छत्तीसगढ़में जितने भी उपचुनाव हुए उसमे सत्ता पक्ष की सरकार का प्रभाव देखने को मिला। छत्तीसगढ़ में राज्य निर्माण के बाद अब तक हुए 13 विधानसभा के उप चुनाव हुए और सभी के परिणाम भी यही बयां करते हैं। यहां हर बार सत्ता पक्ष की जीत हुई है। हालांकि इनमें केवल एक अपवाद है जो कि आज भी याद किया जाता है जब 2006 में कोटा में हुए उप चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी डा. रेणु जोगी ने जीत हासिल की थी। पूर्ववर्ती भाजपा की सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के कार्यकाल में कोटा में डा. जोगी की जीत काफी चर्चित रही है।

कैसा था भानुप्रतापपुर का 2018 का चुनाव
अभी हो रहे उपचुनाव से पहले 2018 में विधानसभा चुनाव हुए थे। इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 147982 वोटर्स है। और EC की वेबसाइट के अनुसार कुल 256 पोलिंग स्टेशन में 77.68 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। पिछली बार आम चुनाव में महिला पुरुष समेत कुल 11 लोगों ने नामांकन भरा था जिसमे तीन लोगों ने नाम वापस ले लिया था, जिसके बाद फाइनल में पांच प्रत्याशी ही मैदान में बचे थे। मुख्या मुकाबला भाजपा के देव लाल दुग्गा और कांग्रेस के मनोज सिंह मंडावी के बीच था। 12 नवंबर 2018 को मतदान का दिन था और 11 दिसम्बर 2018 को काउंटिंग और परिणाम जारी किए गए जिसमे कांग्रेस के मनोज सिंह मंडावी को 72520 वोट और भाजपा के देव लाल दुग्गा को 45827 वोट मिले। EC की वेबसाइट के अनुसार 26693 वोट के मार्जिन जो लगभग 18.59% के साथ कांग्रेस के मनोज सिंह मंडावी भानुप्रतापपुर के विधायक चुने गए।

ब्रम्हानंद नेताम साल 2008 में रह चुके हैं विधायक
ब्रम्हानंद नेताम भानुप्रतापपुर से साल 2008 में विधायक रह चुके हैं। मनोज मंडावी को एक बार हरा चुके हैं। 2008 में नेताम को 41384 वोट मिले थे वहीँ उस वक्त के निर्दलीय प्रत्याशी मनोज मंडावी को 25905 वोट मिले थे। नेताम का नाम इस इलाके से चर्चा में है। आदिवासी संगठनों में इनकी पैठ अच्छी मानी जाती है। इस बार भाजपा आदिवासी आरक्षण के मुद्दे के साथ चुनाव में है। नेताम की समाज में पैठ का फायदा भाजपा को मिल सकता है।

कांग्रेस का दावा जीत पक्की
वहीँ कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री मंडावी दिवंगत विधायक मनोज मंडावी की पत्नी है। कांग्रेस के नाम फाइनल करने से पहले ही उन्होंने सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर दिया था। कांग्रेस के रणनीतिकारों का कहना है, सावित्री को समाज की सहानुभूति मिलेगी। दूसरे उनकी छवि एक भद्र महिला की है, इससे विपक्षी उम्मीदवारों को उनपर सीधा हमला करने का कोई तरीका नहीं मिलेगा। और इअसा ही देखने को मिल रहा है।

कांग्रेस विधायक के निधन से खाली हुई है सीट
भानुप्रतापपुर से कांग्रेस विधायक मनोज कुमार मंडावी का 16 अक्टूबर की सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उसके बाद इस सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। निर्वाचन आयोग ने चुनाव की अधिसूचना 10 नवम्बर को जारी कर दिया है। 17 नवम्बर तक मतदान की अंतिम तिथि है। नया विधायक चुनने के लिए पांच दिसम्बर को मतदान होगा। आठ दिसम्बर को मतगणना होगी और परिणाम घोषित किया जाएगा।