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छत्तीसगढ़ में भारत बंद का बड़ा असर, कहीं मॉल में तोडफ़ोड़ तो कहीं नेशनल हाइवे जाम

राजधानी रायपुर में SC/ST समुदाय के लोगों ने जहां दल बनाकर सड़क पर रैली निकाल कर दुकानें बंद कराई
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रायपुर

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Chandu Nirmalkar

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Updated: 2 Apr 2018, 6:17 PM IST

CG News

रायपुर . अनुसूचित जाति-जनजाति के आह्वान पर भारत बंद का बड़ा असर छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है। राजधानी रायपुर में में SC/ST समुदाय के लोगों ने जहां दल बनाकर सड़क पर रैली निकाल कर दुकानें बंद कराई। वहीं, बिलासपुर में प्रदर्शनकारियों ने मॉल में तोडफ़ोड कर दिया। भिलाई में नेशनल हाइवे पर सुबह से ही समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर रैली निकाली।

इसकी वजह से रायपुर से दुर्ग की ओर आने वाले वाहन जाम में फंस गए। बड़ी संख्या में बैनर पोस्टर लेकर समाज के लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते दिखे। नेशनल हाइवे में घंटों जाम की मुसीबत से लोगों को सामना करना पड़ा।

कांग्रेस और जोगी का समर्थन
भारत बंद को कांग्रेस और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने अपना समर्थन दिया है। राजधानी में सुबह से दलितों के संग कांग्रेस और जोगी के कार्यकर्ता सड़क पर उतर कर रैली निकाली और लोगों से बंद में सहयोग करने की अपील किए। दुर्ग जिला मुख्यालय में विधायक अरूण वोरा अपने समर्थकों के साथ बंद का आह्वान करते हुए प्रदर्शन करते दिखे।

गौरवपथ में जबरन रोक दिया राहगीरों को
राजधानी के गौरवपथ में बाइकों के पहिए उस वक्त थम जब एसटीएसटी जाति के लोग सड़क पर बैठकर धरना प्रदर्शन करने लगे। इससे मजबूर में राहगीरों को रूकना पड़ा। अंबेडकर चौक के पास पुलिस आने के बाद भी प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठे रहे। जोर जबरदस्ती करने के दौरान हालाल बेकाबू हो गए थे। हालांकि पुलिस की टीम ने लोगों को समझाइश देकर मामला शांत करवा लिया। इससे सड़क पर नगर घड़ी चौक तक लंबी जाम लग गई थी। इधर भारत बंद के चलते पेट्रोल पंप भी बंद रहे। हालांकि दोपहर बाद पेट्रोल पंप खुल गए।

केंद्र सरकार आज करेगी पुनर्विचार याचिका दाखिल
केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में आज एक पुनर्विचार याचिका दायर कर एससी-एसटी के कथित उत्पीडऩ को लेकर तुरंत होने वाली गिरफ्तारी और मामले दर्ज किए जाने को प्रतिबंधित करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती देगी।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय द्वारा दाखिल किए जाने वाली इस याचिका में यह तर्क दिया जा सकता है कि कोर्ट के फैसले से एससी और एसटी एक्ट 1989 के प्रावधान कमजोर हो जाएंगे।