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वेयर हाउस निर्माण से लेकर उपकरण खरीदी में 15 करोड़ का हुआ गोलमाल, पर अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं

छत्तीसगढ़ वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन में गोदाम बनाने से लेकर उपकरण खरीदी में 15 करोड़ रुपए का गोलमाल हुआ है

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वेयर हाउस निर्माण से लेकर उपकरण खरीदी में 15 करोड़ का हुआ गोलमाल, पर अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं

रायपुर. छत्तीसगढ़ वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन में गोदाम बनाने से लेकर उपकरण खरीदी में 15 करोड़ रुपए का गोलमाल हुआ है। कॉर्पोरेशन ने जशपुर, कोरिया, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, बलरामपुर, सूरजपुर, नारायणपुर, सरगुजा और बस्तर जिलों में जून 2016 में 77 हजार 4 सौ मीट्रिक टन क्षमता के 10 गोदाम बनाने के लिए टेंडर जारी किया था।

टेंडर प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन एमडी जुलाई 2016 में रिटायर होने वाले थे। इन गोदामों के निर्माण के लिए संचालक मंडल से सहमति भी नहीं ली गई। संचालक मंडल को पता चला कि इन गोदामों के लिए नान से व्यवसायिक सहमति नहीं मिली है।

इसके बाद भी एमडी की सहमति से सभी गोदामों के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया। मामले की जांच में आरोप तय होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई। विभाग के ही जिम्मेदारों द्वारा एक ठेकेदार को फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर 10 करोड़ का काम दे दिया गया था। 6 अगस्त 2013 को जांजगीर की मेसर्स संतोष कुमार अग्रवाल एंड कंपनी ए-4 को फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करके 10 करोड़ 71 लाख 78 हजार 178 रुपए का टेंडर दे दिया गया था।

आरोपी अधिकारी को बनाया जांच कमेटी का मुखिया : आरोप तो ये भी हैं कि जिम्मेदार अधिकारी को राजनीतिक संरक्षण हासिल होने के कारण ये सब संभव हुआ। तमाम शिकायतों के बाद उन्हें कार्यपालन अभियंता के पद से हटाया गया। जांच के बाद चार इंजीनियर की कमेटी बनाई गई, लेकिन उस कमेटी का मुखिया भी आरोपी अधिकारी को ही बना दिया गया।

1 करोड़ 98 लाख 60 हजार 400 रुपए के कैमरे
सीडब्ल्यूडी सी ने 10 शाखाओं के गोदाम में 6-6 कैमरे लागने की योजना बनाई थी। इस तरह कुल 60 कैमरे लगाने थे। विभाग के अधिकारियों ने मनमानी करतें हुए 468 कैमरे लगवा दिए। इस तरह इस काम में कुल 1 करोड़ 98 लाख 60 हजार 400 रुपए खर्च कर अतिरिक्त 1 करोड़ 76 लाख की वित्तीय अनियमितता की गई। गौर करने वाली बात यह है कि कैमरे लगाने के काम में 75 प्रतिशत राशि का अग्रिम भुगतान कर दिया गया था। इस मामले में विभागीय जांच अधिकारी ने कार्रवाई करने के लिए लिखा था।

मिलीभगत से होते रहे घोटाले
कई वर्षों से कॉर्पोरेशन में ये सारे कारनामे आला अधिकारियों की मिलीभगत से चलते रहे। उस समय कार्यपालन अभियंता के पास कॉर्पोरेशन की 19 शाखाओं का दोहरा प्रभार था। लगभग सारे तकनीकी काम वे अकेले संभालते रहे।

मामले की जानकारी नहीं है
स्टेट वेयर हाउस कॉर्पोरेशन के एमडी जन्मेजय महोबे ने बताया कि कुछ दिन पहले ही मैंने पदभार लिया है। इस वजह मुझे मामले की जानकारी नहीं हैं। फाइल मंगवा के देखता हूं।