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सरसों ने खोले तरक्की के रास्ते, महिला किसान बनी आत्मनिर्भर, जानें बजरहीन बाई गोंड़ की सफलता की कहानी…

CG News: छत्तीसगढ़ में किसान आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं के सहयोग से निरंतर प्रगति कर रहे हैं। बजरहीन बाई गोंड़ ने सरसों की खेती से सफलता की मिसाल पेश की है।

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सरसों ने खोले तरक्की के रास्ते, महिला किसान बनी आत्मनिर्भर, जानें बजरहीन बाई गोंड़ की सफलता की कहानी...(photo-patrika)

सरसों ने खोले तरक्की के रास्ते, महिला किसान बनी आत्मनिर्भर, जानें बजरहीन बाई गोंड़ की सफलता की कहानी...(photo-patrika)

CG News: भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ खेती न केवल आजीविका का साधन बल्कि आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव भी है। छत्तीसगढ़ में किसान आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं के सहयोग से निरंतर प्रगति कर रहे हैं। इसी कड़ी में मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के ग्राम बिंदावल की कृषक महिला बजरहीन बाई गोंड़ ने सरसों की खेती से सफलता की मिसाल पेश की है।

CG News: 30 वर्षों से खेती से जुड़ी हैं बजरहीन बाई गोंड़

बजरहीन बाई गोंड़ पिछले 30 वर्षों से कृषि कार्य में संलग्न हैं। उनके परिवार की आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत और लगन से खेती को आगे बढ़ाया और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार किया।

कृषि विभाग की योजना से मिला सहयोग

वर्ष 2025-26 में बजरहीन बाई गोंड़ ने कृषि विभाग की सरसों फसल प्रदर्शन योजना में भाग लिया। योजना के अंतर्गत उन्हें 1.970 हेक्टेयर क्षेत्र में उन्नत किस्म के सरसों बीज उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही कृषि विभाग लोरमी द्वारा खाद, रोग-व्याधि नियंत्रण किट और समय-समय पर कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन भी दिया गया।

उन्नत तकनीक से बढ़ा उत्पादन

आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह का फसल पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। असिंचित क्षेत्र में उन्होंने 1 हेक्टेयर भूमि से 16 क्विंटल सरसों का उत्पादन प्राप्त किया, जो क्षेत्र की औसत उपज से कहीं अधिक है। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

आर्थिक मजबूती के साथ बढ़ा आत्मविश्वास

बेहतर उत्पादन के चलते बजरहीन बाई गोंड़ के परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। उनका कहना है कि कृषि विभाग की योजनाओं ने उन्हें केवल आर्थिक लाभ ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी प्रदान की है।

कृषि विभाग और प्रशासन के प्रति जताया आभार

अपनी सफलता का श्रेय बजरहीन बाई गोंड़ ने कृषि विभाग लोरमी और जिला प्रशासन मुंगेली को दिया है। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह किसानों को मार्गदर्शन और सहयोग मिलता रहे, तो ग्रामीण क्षेत्रों में खेती से समृद्धि संभव है।