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रायपुर. राज्य विधानसभा के लिए इस वर्ष के आखिर में हो रहे आम चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भाजपा अपने सबसे ताकतवर दौर में है, ऐसे में उसके नेता सत्ता गवाना नहीं चाहते वहीं 15 वर्षों से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस वापसी की सबसे बड़ी कोशिश कर रही है। जीत के लिए उम्मीदवारों का चयन दोनों ओर की चुनौती है। कांग्रेस में यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन भाजपा अपने स्तर पर उम्मीदवारी योग्य नेताओं की थाह ले रही है।
भाजपा: आचार संहिता लगने के बाद जाएंगे पर्यवेक्षक
भाजपा इस वर्ष की शुरुआत से ही जमीनी हालात टटोलने में लगी हुई है। विधायकों के कामकाज को लेकर सर्वेक्षणों की शुरुआत तो काफी पहले हो गई थी। इस वर्ष कांग्रेस के कब्जे वाले क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों के नाम की भी गोपनीय ढंग से तलाश हुई है। इस काम में समयदानी कार्यकर्ताओं की भी भूमिका रही है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी ओर से भी एक आंकलन रिपोर्ट तैयार किया है। चुनाव नजदीक आने के साथ स्थानीय नेताओं में बेचैनी है, लेकिन पार्टी स्तर पर निश्चिंतता दिख रही है। पिछले सप्ताह रायपुर में हुई प्रदेश कार्यसमिति में टिकट वितरण को लेकर चर्चा तक नहीं हुई। कहा जा रहा है कि पार्टी जरूरी सूचनाएं जुटा चुकी है। निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव का कार्यक्रम जारी होने के बाद पर्यवेक्षक विधानसभा क्षेत्रों में जाकर कार्यकर्ताओं से नाम लेंगे। उन्हीं से उम्मीदवार का चयन होगा।
पिछली बार भी यही आधार
2013 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने टिकट वितरण का करीब-करीब ऐसा ही फार्मुला तय किया था। टिकटों की घोषणा भी नामांकन की तिथि के करीब हुई थी।
विकास यात्रा भी टिकट का आधार
पार्टी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की विकास यात्रा भी टिकट का आधार बन सकती है। यात्रा का दूसरा चरण चल रहा है। पहले और दूसरे चरण में स्थानीय नेताओं का योगदान और सक्रियता का आकलन किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट बन रही है, टिकट पर चर्चा के समय नेता इस पर भी ध्यान रखेंगे।
छत्तीसगढ़ भाजपा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि अभी तो चुनाव की घोषणा नहीं हुई है। आचार संहिता लगने के बाद प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के दौरे की ही तैयारी चल रही है।
कांग्रेेस: उम्मीदवार तय करने के करीब, चल रही मशक्कत
कांग्रेस ने इसबार टिकट वितरण का फॉर्मुला पूरी तरह बदल दिया है। इस बार सभी दावेदारों से ब्लॉक समितियों के जरिए आवेदन लिए गए। उन आवेदनों पर विधानसभा वार बूथ समितियों के अध्यक्षों, ब्लॉक पदाधिकारियों और विधानसभा समन्वयकों के बीच चर्चा हुई। वहां से सूची जिला कांग्रेस समिति और फिर प्रदेश चुनाव समिति तक पहुंची। प्रदेश चुनाव समिति ने तीन बैठकों में कुछ सीटों पर नाम फाइनल कर लिए हैं।
कुछ सीटों पर पैनल बनाकर उसे छानबीन समिति को सौंप दिया है। पहली पर छत्तीसगढ़ में छानबीन समिति की बैठकें हुई हैं। कहा जा रहा है कि ब्लॉक, जिला, प्रदेश समिति, छानबीन समिति और एआइसीसी के आंतरिक सर्वेक्षण में आए कॉमन नाम वाले को टिकट दिया जाएगा। छानबीन समिति जल्दी ही केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण को अपनी सिफारिशें सौंप देगा।
इन पर नजर
कांग्रेस इस बार भितरघात के खतरों से उबरना चाहती है। ऐसे में उसे सर्वस्वीकार्य और जिताउ उम्मीदवार पर ही दांव लगाने में सुभिता महसूस हो रही है। ऐसे में कुछ विधायकों का टिकट भी खतरे में है।
बदला फार्मूला
कांग्रेस में पिछली बार टिकट वितरण का फॉर्मुला बिल्कुल उलट था। दावेदारों ने आवेदन दिए थे। इस बार की तुलना में ज्यादा आवेदन आए थे। उन आवेदनों को मंगाकर पीसीसी की चुनाव समिति ने चर्चा की थी और छानबीन समिति को भेज दिया था। प्रदेश पदाधिकारियों से चर्चा के बाद उन्हें चुनाव प्राधिकरण भेजकर नाम फाइनल कर लिए गए थे।
कांग्रेस विधायक दल के नेता टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश चुनाव समिति अपना काम कर चुकी है। छानबीन समिति का काम भी अंतिम दौर में है। समिति अपनी रिपोर्ट केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण को सौंपेगी। वहां चर्चा के बाद सूची फाइनल हो जाएगी।
Updated on:
17 Sep 2018, 12:42 PM IST
Published on:
17 Sep 2018, 12:42 PM IST
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