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नकली दवा के कारोबारी को बचाने रचा खेल, बैक डेट का स्टाम्प खरीदा, नौकर को प्रोपराइटर बनाने की तैयारी

तीन माह पहले मेडिकल स्टोर से 70 हजार की नकली दवाएं हुई थी जब्त

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नकली दवा के कारोबारी को बचाने रचा खेल, बैक डेट का स्टाम्प खरीदा, नौकर को प्रोपराइटर बनाने की तैयारी

नकली दवा के कारोबारी को बचाने रचा खेल, बैक डेट का स्टाम्प खरीदा, नौकर को प्रोपराइटर बनाने की तैयारी

रायपुर . नकली दवाओं से लाखों लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले आरोपी पर तीन माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। पत्रिका की पड़ताल में अहम खुलासा हुआ है कि अब आरोपी दवा कारोबारी खुद को बचाने के लिए अपने नौकर को फर्म और देवपुरी स्थित गौतम मेडिकल्स का प्रोपराइटर बनाने की तैयारी में है। इसके लिए बैक डेट का स्टाम्प पेपर भी एक वेंडर से मंगा लिया गया है। स्टाम्प पेपर और खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अफसरों की मदद से यह खेल किया जा रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नियंत्रक का तबादला हो चुका है, एेसे में मामले को ठंडे बस्ते में डालने की पूरी तैयारी है।

इसलिए हो रही है चालान पेश करने में देरी
तीन माह पहले खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 20 लाख रुपये की नकली दवाएं जब्त करने के बाद कानूनी प्रक्रिया अब तक नहीं की है। विभाग द्वारा चालान कोर्ट में पेश करने में जानबूझकर देरी की जा रही है। इसके पीछे कारण यह है कि यदि चालान पेश करने में 90 दिन से ज्यादा का समय विभाग को लगता है तो उसका लाभ पूरी तरह से आरोपी दवा कारोबारी को मिलेगा।

10 साल की सजा का प्रावधान

नकली दवा बेचने के मामले में रिपोर्ट आने के एक महीने बाद जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मेडिकल दुकान का लाइसेंस रद्द किया था। लेकिन अब तक इस पर एफआईआर नहीं हुई। मामले में 10 साल की सजा का प्रावधान है। लैब में सैम्पल जांच की रिपोर्ट आने के बाद सील 70 हजार दवाओं को जब्त कर लिया गया था। जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा एक महीने के बाद अब गौतम मेडिकल दुकान पर कार्रवाई करते हुए लाइनेंस रद्द किया गया।

फरार बता रहे हैं मुख्य आरोपी को
नकली दवा व्यापारी राजधानी में ही है और विभाग के अफसर उसे फरार बता रहे हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि विभाग ने फरार आरोपी की तलाश करने के संबंध अब तक पुलिस की भी मदद नहीं ली है। यह पूरा खेल आरोपी को बचाने के लिए किया जा रहा है। इस पूरे खेल में आरोपी फर्म का एक कर्मचारी, जो पहले एक अस्पताल से 30 हजार की नौकरी छोड़कर इस नकली दवा के कारोबार में शामिल हुआ था। वह खुद को एक मंत्री का रिश्तेदार बताकर मामले को दबाने में जुटा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि वह भी नकली दवा के कारोबार में साझेदार था।

आरोपी फरार बताया जा रहा है। नकली एंटीबायोटिक दवाएं विक्रय पर गौतम मेडिकल का लाइसेंस पहले ही रद्द कर दिया गया है। जल्द ही कोर्ट में चालान पेश किया जाएगा।
सत्यनारायण राठौर, नियंत्रक, राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग