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हड़ताली कर्मचारियों का वेतन नहीं होगा स्वीकृत, ब्रेक-इन-सर्विस मान कर की जाएगी कार्रवाई

Chhattisgarh State Employees Strike: आठ दिनों से प्रदेशभर के कर्मचारियाें-अधिकारियों द्वारा की जा रही हड़़ताल को लेकर अब प्रशासन भी चिंतित हो गया है। आम लोगों की परेशानी को देखते हुए शासन ने अब बातचीत शुरू कर दी है।

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Chhattisgarh State Employees Strike: रायपुर. छत्तीसगढ़ के राज्य कर्मचारी भत्ता बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल में बैठे है इसी बीच कर्मचारियों पर सख्ती शुरू हो गई है। सरकार ने हड़ताल में शामिल नहीं हुए कर्मचारियों को पिछली हड़ताल के दिनों का वेतन जारी करने का निर्देश दिया है। वहीं हड़ताल में शामिल कर्मचारियों पर साल 2006 में जारी एक शासकीय परिपत्र के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा गया है।

कर्मचारी संगठन कई महीनों से केंद्र सरकार की तरह 34% महंगाई भत्ता देने की मांग कर रहे थे। उनकी मांग थी, इस दर तक पहुंचने के लिए उनका भत्ता 12% बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं सातवें वेतनमान की सिफारिशों के मुताबिक मूल वेतन का 18% गृह भाड़ा भत्ता की मांग भी साथ-साथ उठी है। जुलाई में पांच दिनों की हड़ताल के बाद सरकार ने महंगाई भत्ते में 6% इजाफे का आदेश जारी कर दिया। वहीं गृह भाड़ा भत्ता के लिए आश्वासन हाथ आया। उसके बाद 22 अगस्त से कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए।

हड़ताली कर्मचारियों का वेतन नहीं होगा स्वीकृत

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी विभागाध्यक्षों एवं कलेक्टर्स को निर्देश जारी कर कहा गया है कि विभिन्न कर्मचारी संगठनों के आव्हान पर जो कर्मचारी 25 से 29 जुलाई तक हड़ताल में थे एवं वर्तमान में हड़ताल में शामिल नहीं हैं, उन्हें उक्त अवधि को अवकाश स्वीकृत करते हुए वेतन भुगतान किया जाए। इसके अलावा जो कर्मचारी 22 अगस्त से हड़ताल में हैं उनका वेतन भुगतान न किया। सामान्य प्रशासन द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि अनुपस्थिति के संबंध में 10 अप्रैल 2006 को जारी परिपत्र के अनुसार कार्यवाही की जाए। उक्त परिपत्र में जारी निर्देश के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बिना पूर्व स्वीकृति के सामूहिक अवकाश पर जाने की दशा में अथवा हड़ताल का वेतन इत्यादि देय नहीं होगा न ही इस प्रकार की अनुपस्थिति के दिवसों का अवकाश स्वीकृत किया जाएगा। ऐसे दिवसों की अवधि का कोई वेतन इत्यादि देय नहीं होगा और इस अवधि को ब्रेक-इन-सर्विस माना जाएगा।