
राहुल जैन / रायपुर . छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर विभिन्न विभागों में अफसर और कर्मचारी बेखौफ होकर नौकरी कर रहे हैं। सरकार की ओर से गठित उच्चस्तरीय छानबीन समिति ने पिछले एक साल में 59 अधिकारियों और कर्मचारियों के जाति प्रमाणपत्र को फर्जी पाया है। इन्हें नौकरी से हटाने का आदेश भी हुए हैं। दो-चार मामलों को छोड़कर ज्यादातर अभी भी नौकरी कर रहे हैं। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के प्रकरण के बाद अब उच्चस्तरीय छानबीन समिति के गठन पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
वर्तमान में उच्चस्तरीय छानबीन समिति के पास 124 अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच लंबित है। जबकि समिति ने करीब एक साल में 98 प्रकरणों की जांच की है। इनमें से 59 प्रकरण में जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। खास बात यह है कि शासन के पास जो शिकायतें हैं, उनमें सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सबसे अधिक शिकायते हैं।
सर्व आदिवासी समाज ने दी थी 534 की सूची
सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी अध्यक्ष बी.एस. रावटे ने बताया कि 2003 से 2005 के बीच समाज ने 534 लोगों की सूची दी थी। समिति की जांच इतनी धीमी है कि अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने मांग की है कि जिनके जाति प्रमाणपत्र फर्जी निकले हैं, उन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ वसूली की भी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जांच में हो रही देरी के लिए अफसरों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
जनप्रतिनिधियों के साथ बीएसपी के भी कर्मचारी
जिनके जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं, उनमें सात जनप्रतिनिधियों के नाम भी शामिल हैं। इसके साथ भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के दो कर्मचारियों के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, शिक्षा विभाग, पशु चिकित्सक, आदिम जाति कल्याण विभाग, जल संसाधन विभाग, जीवन बीमा निगम, कृषि विभाग, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, मुख्यमंत्री सचिवालय, भारतीय स्टेट बैंक जैसे अन्य संस्थानों के नाम शामिल हैं।
कुछ को न्यायालय से मिला स्थगन
बताया जाता है कि ऐसे मामलों में विभागीय अधिकारी ही संबंधितों को न्यायालय में जाने का मौका दे देते हैं। इस वजह से प्रकरण लंबा खींच जाता है। कुछ मामलों में न्यायालय ने स्थगन दे रखा है। माध्यमिक शिक्षा मंडल, पॉलीटेक्निक कॉलेज और शिक्षा विभाग ने आरोपियों को हटाने की कार्रवाई भी की है।
इन जातियों के बने फर्जी प्रमाणपत्र
उरांव, थारिया, हल्बा, भतरा, भील, सूर्यवंशी, सतनामी, बलई, रैदास, महार, बैगा, गोंड, चिकवा, नगारची, नागेशिया, चत्री, माना मन्नेवार, प्रजापति।
प्रमाणपत्रों की जांच
छानबीन समिति नियमित तौर पर प्रमाणपत्रों की जांच कर रही है। जाति प्रमाणपत्र फर्जी निकलने के बाद विभागों को भी कार्रवाई के लिए कहा जाएगा।
- केदार कश्यप, अजजा विकास मंत्री, छत्तीसगढ़
Published on:
15 Mar 2018 08:15 am

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