मंत्री ने स्वीकार किया कि इसमें 216.08 करोड़ का घोटाला हुआ है और इसमें राशन दुकान संचालकों पर कार्रवाई की गई है। इस पर सत्तापक्ष के विधायकों ने किसी भी अफसर पर कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाए और सदन की समिति से जांच की मांग की। सरकार की तरफ से संसदीय कार्यमंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सदन की समिति से जांच कराने की घोषणा की। बता दें कि यह घोटाला पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय हुआ था। प्रश्नकाल में विधायक धरमलाल कौशिक ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा, चावल माफियाओं ने गरीबों के चावल की अफरा-तफरी की है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने 24 मार्च 2023 तक रिपोर्ट देने की बात कही थी, लेकिन इससे पहले ही वे रफूचक्कर हो गए। यह जो जांच का लंबित मामला है, क्या तय समय में रिपोर्ट आई। इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि रिपोर्ट तय समय पर नहीं आ सकी थी। मंत्री ने कहा, मैं स्वीकार करता हूं कि अनियमितता हुई है। इस पर धरमलाल कौशिक ने कहा, जब अनियमितता हुई है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। विधायक अजय चंद्राकर और राजेश मूणत ने भी कार्रवाई नहीं होने पर आपत्ति जताई। मंत्री ने बताया कि 227 दुकानों को निलंबित किया गया। 181 दुकानों को निरस्त किया गया है और 24 दुकानदारों पर एफआईआर हुई है।