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CG Medical Education: ईडब्ल्यूएस कोटे में बड़ा खेल, गरीब सवर्ण की मेडिकल सीटों पर करोड़पति ले रहे एडमिशन

CG Medical Education: एमबीबीएस कोर्स में गोरखधंधे का खुलासा कर रहा है। गुरुवार को पहले राउंड की काउंसलिंग खत्म हो गई है। इसमें डीएमई कार्यालय ने एमबीबीएस की 2130 में 1541 सीटाें का आवंटन किया था।

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पीलूराम साहू CG Medical Education: प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में गरीब सवर्गों (ईडब्ल्यूएस) कोटे की सीटों पर करोड़पति पैरेंट्स के बच्चे एडमिशन ले रहे हैं। ये हम हवा में बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा विभाग की आवंटन सूची के अनुसार इस खेल का खुलासा कर रहे हैं। 6 छात्रों की वास्तविक केटेगरी ईडब्ल्यूएस है, जिन्हें यूआर में निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें मिली हैं। इनमें सभी ने एडमिशन भी ले लिया है।

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ईडब्ल्यूएस कोटे के लिए सालाना आय 8 लाख या इससे कम होनी चाहिए। जबकि इन मेडिकल कॉलेजों में सालाना ट्यूशन फीस 7.45 से 8.02 लाख रुपए है। यानी साढ़े चार साल कोर्स की फीस 33.52 से 36 लाख रुपए है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि ये छात्र गरीब सवर्ण केटेगरी के कैसे हुए? क्या चिकित्सा शिक्षा विभाग इन छात्रों का प्रवेश रद्द करेगा या असल गरीब सवर्णों का हक ऐसा ही मारा जाता रहेगा?

पहले ही हो चूका है खुलासा

पत्रिका पहले भी इस बात का खुलासा कर चुका है कि निजी में एमबीबीएस करने वाले कुछ छात्र सरकारी मेडिकल कॉलेज में ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत पीजी कर रहे हैं। अब एमबीबीएस कोर्स में गोरखधंधे का खुलासा कर रहा है। गुरुवार को पहले राउंड की काउंसलिंग खत्म हो गई है। इसमें डीएमई कार्यालय ने एमबीबीएस की 2130 में 1541 सीटाें का आवंटन किया था। इसमें 900 से ज्यादा सीटों पर एडमिशन हो चुका है।

यही नहीं बीडीएस कोर्स में भी 7 छात्रों को निजी कॉलेजों में सीटों का आवंटन किया गया है। निजी कॉलेजों में साढ़े 4 साल के कोर्स की ट्यूशन फीस 10 लाख रुपए से ज्यादा है। मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में अन्य मद में फीस लिए जा रहे हैं, जिन्हें पैरेंट्स को देना होगा। जानकारों के अनुसार एक गरीब सवर्ण अपने बच्चों को निजी मेडिकल कॉलेज में नहीं पढ़ा सकता। इसका मतलब साफ है कि ये गलत तरीकेे से सर्टिफिकेट बनवाए गए हैं।

लक्ष्य सरकारी का, प्रवेश निजी में

जिन छात्रों ने ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत सर्टिफिकेट बनवाकर निजी कॉलेजों में प्रवेश लिया है, उनका मुख्य लक्ष्य सरकारी कॉलेजों में एडमिशन लेना था। जो कट ऑफ है, उनमें सभी छात्रों को पिछले साल सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल जाता। लेकिन इस साल हाई कट ऑफ जाने के कारण इन्हें निजी कॉलेजोें में सीटें मिली हैं। जिनका स्कोर 544 है, उन्हें यूआर कोटे से पिछले साल सरकारी कॉलेज मिल जाता। वहीं बाकी 5 को ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत। किसी को उम्मीद नहीं थी कि इस साल कट ऑफ हाई जाएगा। 4 जून को रिजल्ट आने के बाद छात्र रैंक से हतप्रभ रह गए। इस बार पेपर लीक का मामला सुप्रीम कोर्ट तक चला गया था। हालांकि कोर्ट ने दोबारा परीक्षा कराने से इनकार कर दिया था।

एमबीबीएस कोर्स में इनका एडमिशन

नीट स्कोर कॉलेज
544 बालाजी
495 अभिषेक
493 रिम्स
487 रावतपुरा
489 अभिषेक
482 रावतपुरा

डीएमई डॉ. यूएस पैकरा ने कहा छात्रों के सर्टििफकेट के अनुसार सीटें आवंटन कर एडमिशन दिया जाता है। दस्तावेज सत्यापन में भी सर्टिफिकेट की वैधता जांची जाती है कि इसे सक्षम अधिकारी ने बनाया है या नहीं। जिन्हें कोई शिकायत हो, तभी कार्रवाई हो सकती है।