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बंधन जब तक टूटता नहीं है, तब तक मुक्ति नहीं : अनिमेष

पर्वाधिराज पर्युषण पर्व

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बंधन जब तक टूटता नहीं है, तब तक मुक्ति नहीं : अनिमेष

बंधन जब तक टूटता नहीं है, तब तक मुक्ति नहीं : अनिमेष

नवापारा-राजिम। सदर रोड स्थित जैन भवन में चल रहे पर्वाधिराज पर्युषण पर्व में उत्तम संयम की महिमा बताते हुए ब्रह्मचारी अनिमेष भैय्या ने धर्मसभा में बताया कि संयम का मतलब बंध जाना है। व्रत-नियम में कानून में बंध जाना। हरेक क्षेत्र में संयम की बड़ी आवश्यकता है। बंधन जब तक टूटता नहीं है, तब तक मुक्ति नहीं है। जिस प्रकार ऊंट के लिए नकेल, घोड़ों के लिए लगाम, मोटर के लिए ब्रेक की आवश्यकता है, उसी प्रकार मनुष्य के लिए ब्रेक, बंधन, संयम की आवश्यकता है। कोई भी कार चाहे वह नई, सुन्दर हो, उसे ठीक रास्ते व ठीक गति से चलाने के साथ-साथ ब्रेक का प्रयोग भी करना पड़ेगा। नई कार की सुरक्षा के लिए भी इतने बंधन है।
उन्होंने कहा कि समय अनादि कालीन बंधनों को तोडऩे के लिए एक बंधन है। मनुष्य पर ब्रेक नहीं हो तो इससे ज्यादा खतरा और किसी से नहीं होता। जब संयम नहीं है और मस्तिष्क में विकार आ जाता है, तब वह किसी को सुखी नही बना सकता। भगवान महावीर जो इतने पुरुषार्थी थे उनको भी 12 साल लग गए। उनका भी मन एक मिनट अन्दर रहता तो दो मिनट बाहर जाता। तब हम तो इतने कमजोर हैं, हमको तो बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। हमको उदास होकर नहीं बैठना है, फिर पुरुषार्थ करना है। संयम को धारण करना है। आज की शांतिधारा के पुण्यार्जक- स्वर्ण कलश - रमेश स्वपन चौधरी, रजत कलश - प्रकाश आशीष चौधरी, रजत कलश - अंजय सिंघई, दीप प्रज्वलन -अजित, अभिजीत चौधरी, जिनसहस्त्रनाम वाचन तनीषा तथा अनुभा द्वारा किया गया। कल स्वाध्यायी मनोज जैन द्वारा वाचन किया जाएगा।