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छत्तीसगढ़ियों से छीन रहे नौकरी… मंत्रिपरिषद के फैसले की गलत व्याख्या कर दूसरे राज्यों के लोगों की भर्ती के लिए बदल दिए पैमाना

CG News: छत्तीसगढ़ियों से अब नौकरी भी छीनी जा रही है। आलम यह है कि मंत्रिपरिषद के फैसले की गलत व्याख्या कर दूसरे राज्यों के लोगों को लाभ देने के लिए प्राथमिकता का पैमाना ही बदल दिया..

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CG News,

छत्तीसगढ़ियों से छीन रहे नौकरी ( File Photo Patrika )

गौरव शर्मा. छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में अतिथि व्याख्याताओं के पदों पर मूल निवासियों की भर्ती की जानी है। ( CG News ) मंत्रिपरिषद की ओर से जारी अतिथि व्याख्याता नीति-2024 में यह बात स्पष्ट है। इसके बावजूद एक साल में इन पदों पर मनमाने तरीके से दूसरे राज्यों के लोगों की भर्ती की गई। विवाद बढ़ा, तो अफसरों ने मंत्रिपरिषद के निर्णय की ही गलत व्याख्या कर दी। प्राथमिकता के लिए तीन नए मापदंड बनाए और कहा गया कि छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अगर इन क्राइटेरिया में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी के बराबर आते हैं, तब जाकर उन्हें नौकरी में प्राथमिकता मिलेगी।

CG News: नई पॉलिसी बनी, बढ़ाए गए पद

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में 2024 तक 2100 अतिथि व्याख्याता काम कर रह थे। इनमें प्लेन पीजी (पोस्ट ग्रेजुएशन) वाले कई अभ्यर्थी भी शामिल थे। पीएचडी, नेट/सेट या एम. फील जैसी योग्यता न होने के बाद भी ये हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के चलते नौकरी कर पा रहे थे। पिछले साल मंत्रिपरिषद की बैठक में इन पदों पर भर्ती के लिए नई पॉलिसी बनी। स्पोर्ट्स टीचर और ग्रंथपाल मिलाकर 1000 से ज्यादा पद भी बढ़ाए गए।

सरकार ने कहा कि नई पॉलिसी से पुराने गेस्ट लैक्चरर्स की नौकरी नहीं जाएगी। हालांकि, उन्हें नई पॉलिसी के तहत बढ़ा हुआ वेतन, विस्थापन और मातृत्व अवकाश नहीं देने की बात कही गई। सालों तक नौकरी करते हुए जिन्होंने पीएचडी, नेट/सेट कर लिया था, ऐसे तकरीबन 600 छत्तीसगढिय़ों को नौकरी में कंटीन्यू कर लिया गया। बाकी 1500 पदों पर भर्ती विज्ञापन जारी किया गया। यानी प्लेन पीजी वालों का पत्ता कट। इनमें से कई के पास 8 से 15 साल तक अध्यापन कार्य का अनुभव है।

नए पदों पर भर्ती के लिए अनुभव आधारित अतिथि व्याख्याता कॉलेज पहुंचे, तो उन्हें दरकिनार करते हुए अन्य राज्यों के लोगों को नौकरियां बांटी जाने लगीं। विरोध हुआ, तो उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों ने इसी महीने की 18 तारीख को संशोधित आदेश जारी करते हुए योग्यता की नई व्याख्या की। इसमें बताया कि पीएचडी (30 नंबर), नेट/सेट (20 नंबर), एम. फील (15 नंबर) और अनुभव (30 नंबर) के आधार पर स्कोर दिए जाएंगे।

इसमें समान मैरिट और समान नंबर होने पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को प्राथमिकता मिलेगी। मतलब अन्य राज्य के व्यक्ति को 100 में 70 नंबर मिले हैं और छत्तीसगढ़ के व्यक्ति को भी 70 नंबर मिलते हैं, तब जाकर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी को नौकरी मिलेगी। 1 नंबर भी कम हुआ, तो मूल निवासियों की प्राथमिकता दरकिनार। जबकि, मंत्रिपरिषद के फैसले में ऐसी किसी बात का जिक्र नहीं था।

20 से सीधे 50 हजार हो गई है तनख्वाह

अतिथि व्याख्याताओं को 2021 तक हर महीने महज 20,800 रुपए वेतन मिलता था। 2022 में कांग्रेस सरकार ने इनकी तनख्वाह बढ़ाकर 30 हजार रुपए कर दी। नई सरकार में पिछले साल इनका वेतन सीधे 20 हजार रुपए बढ़ा दिया गया और इनकी पगार बढ़कर सीधे 50 हजार रुपए पहुंच गई। यही वजह है कि आज इन पदों पर भर्ती के लिए अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आवेदन कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ी अतिथि व्याख्याताओं का कहना है कि जब तक कम पगार में पढ़ाई करवानी थी, हमने काम किया। अब बढ़े हुए वेतन का लाभ मिलना है, तो अन्य राज्यों के लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

एम फिल 7 साल से बंद, सेट परीक्षा 6 साल बाद

स्थानीय अतिथि व्याख्याताओं के आगे योग्यता पूरी करने में बड़ी परेशानी ये भी है कि छत्तीसगढ़ में एम. फिल की पढ़ाई 2017 से बंद है, जबकि सेट की परीक्षा 6 साल बाद जाकर 2024 में हुई। इस परीक्षा के नतीजे भी इसी साल जून में जारी किए गए हैं। यानी एक साल से उच्च शिक्षा विभाग और कॉलेज अतिथि व्याख्याता के पदों पर जो भर्ती कर रहे थे, उसमें योग्य होने के लिए पीएचडी और नेट जैसी 2 परीक्षाओं के अलावा छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के पास दूसरा कोई ऑप्शन नहीं था, जबकि अन्य राज्यों से आने वाले अभ्यर्थियों के पास सभी 4 परीक्षाओं के विकल्प खुले थे। यही वजह है कि अतिथि व्याख्याताओं के ज्यादातर पदों पर अन्य राज्यों के लोगों की नौकरियां लग रहीं हैं।

मूल निवास की जांच की जाए

छत्तीसगढ़ मूलनिवासी अतिथि व्याख्याता प्रदेश अध्यक्ष लव वर्मा ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि महज 200 पदों पर अन्य राज्य के लोगों की भर्ती की गई है। जबकि, कॉलेजों में जो लिस्ट चस्पा की गई है, उस हिसाब से 800 से ज्यादा पदों पर अन्य राज्य के लोगों की भर्ती की जा चुकी है। हमारी मांग है कि सभी अतिथि व्याख्याताओं के मूल निवास की जांच की जाए। मंत्रिपरिषद के फैसले की सही व्याख्या करते हुए इन पदों पर स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए।