1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Patrika Interview: गृहमंत्री विजय शर्मा बोले- जिस जेल में रहा.. मंत्री बनने के बाद उसी जेल का निरीक्षण किया

Patrika Interview: गृहमंत्री विजय शर्मा ने पत्रिका को दिए साक्षात्कार में अपने दो साल के कार्यकाल में किए गए कामों, अब तक की योजनाओं और भविष्य के रोडमैप के बारे में बताया...

4 min read
Google source verification
Patrika Interview minister vijay sharma

छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने पत्रिका को दिए साक्षात्कार ( Photo - Patrika )

Patrika Interview: छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने पत्रिका को दिए साक्षात्कार में अपने दो साल के कार्यकाल में किए गए कामों, अब तक की योजनाओं और भविष्य के रोडमैप के बारे में बताया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मंशा अनुरूप 31 मार्च 2026 तक पहली प्राथमिकता के रूप में प्रदेश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना शामिल है। इस दौरान उन्होंने अपनी व्यक्तिगत बातों को भी साझा किया।

सवाल: डीजी कॉन्फ्रेंस छत्तीसगढ़ में हुई। इससे राज्य और पुलिसिंग को क्या कोई सीधा लाभ मिलने जा रहा है?

गृहमंत्री- डीजी कॉन्फ्रेंस स्वतंत्र भारत के बाद से चली आ रही बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जहां देश की सर्वोच्च स्तर की पुलिसिंग पर चिंतन और समीक्षा होती है। यह सिर्फ किसी राज्य विशेष के लाभ के लिए नहीं होती, बल्कि पूरे देश की पुलिसिंग व्यवस्था सुधारने और भविष्य को दिशा देने के लिए होती है। इस पर आधारित व्यवस्थित स्वरूप में सभी राज्यों को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। यह राष्ट्रीय पुलिसिंग को मजबूत करने की व्यापक प्रक्रिया है।

सवाल: सोशल मीडिया, हेट स्पीच और एआई जनरेटेड कंटेंट को लेकर आपकी क्या रणनीति है?

गृहमंत्री- हेट स्पीच आज की चुनौती है, लेकिन इससे आगे की चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है। अब कुछ ही मिनटों में किसी की नकली तस्वीर, वीडियो या ऑडियो तैयार किया जा सकता है। यह समाज के लिए खतरनाक है।हम ऐसे टूल विकसित कर रहे हैं, जहां कोई भी व्यक्ति टेक्स्ट, फोटो, वीडियो या लिंक अपलोड करेगा और यह बताया जा सकेगा कि वह एआई जनरेटेड है या वास्तविक। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और फेक नैरेटिव रोकने में मदद मिलेगी।

सवाल: नक्सल मोर्चे पर आप कहां खड़े हैं? क्या स्थिति निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है?

गृहमंत्री- अगर स्थिति को प्रतिशत में आंकें तो मैं स्पष्ट कह सकता हूं कि नक्सलवाद का प्रभाव अब 15-20 प्रतिशत के दायरे तक सिमट गया है। क्षेत्रफल के आधार पर देखें तो बस्तर के अधिकांश हिस्से मुक्त हैं। शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर भी इसी अनुपात में गिरावट आई है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है और आने वाले तीन महीनों में तस्वीर और स्पष्ट होकर सामने आएगी।

सवाल: बचे हुए नक्सली नेताओं को सरेंडर कराने और मुख्यधारा से जोडऩे की रणनीति क्या है?

गृहमंत्री- हमने हमेशा दो टूक बात कही है, एक तरफ पुनर्वास नीति है, अपील है, सरेंडर का रास्ता है और दूसरी तरफ सशस्त्र बल हैं। किसी को यह अनुमति नहीं दी जा सकती कि वह बंदूक लेकर जंगलों में घूमे, संविधान को चुनौती दे, निर्दोषों को मारे, शिक्षकों का गला रेते, आईईडी लगाए और समाज को भय में रखे। हम चाहते हैं कि वे लौटें, समाज की मुख्यधारा में शामिल हों, सामान्य जीवन जिएं। अन्यथा सुरक्षा बल अपना काम करेंगे। संविधान बस्तर के हर कोने में लागू होगा। यह हमारा संकल्प है।

सवाल: हिड़मा की मौत के बाद नक्सली संगठन में टूट की चर्चा है, क्या ऐसी खुफिया रिपोर्ट आप तक पहुंचती हैं?

गृहमंत्री- पिछले दो वर्षों के अभियान में कई पीबी और सीसी सदस्य या तो समाप्त हुए हैं या पुनर्वास लेकर मुख्यधारा में लौटे हैं। उनका केंद्रीय ढांचा लगभग बिखर चुका है। अब कोई संगठित, केंद्रीकृत नेतृत्व नहीं बचा है। छोटे-छोटे समूह काम कर रहे हैं। इसलिए यह कहना ज्यादा सही होगा कि संगठन दो भाग में नहीं, बल्कि अनेक हिस्सों में बंट चुका है।

सवाल: कार्यकाल का सबसे बड़ा अनुभव जिससे आपकी भावनाएं जुड़ी हों?

गृहमंत्री: फर्जी प्रकरणों में मुझे जिस जेल में रखा गया, गृहमंत्री बनने के बाद उसी जेल का निरीक्षण करना बहुत भावुक करने वाला पल था। यही हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती है कि जनता जनार्दन आपको आशीर्वाद देकर सेवक के रूप में चुनती है।

सवाल: पुनर्वास नीति की चर्चा। देश में सबसे अलग बनाए जाने का दावा है। इसके खास प्रावधान क्या हैं?

गृहमंत्री- हमारी पुनर्वास नीति बहुत मानवीय और व्यावहारिक है। इनामी नक्सली के लौटने पर उसके ऊपर घोषित राशि उसी को दी जाती है। हथियार के साथ आने पर हथियार का इनाम अलग मिलता है। पहले से बेहतर आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके साथ उनका स्किल डेवलपमेंट कराया जाता है, जमीन के पट्टे दिए जाते हैं, खेतों के लिए बोर की सुविधा, प्रधानमंत्री आवास योजना, तीन साल तक स्किल ट्रेनिंग के दौरान आर्थिक सहयोग तथा परिवार और सामान्य जीवन की बहाली की तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं। यहां तक कि जिनकी जबरन नसबंदी कर दी गई, उनके लिए भी व्यवस्था की गई है ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। उद्देश्य केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि जीवन को फिर से समृद्ध बनाना है।

सवाल: धर्मांतरण कानून को लेकर सरकार क्या कदम उठाने जा रही है?

गृहमंत्री- अभी 1968 का कानून लागू है। 2007-08 में मसौदा बना था लेकिन लागू नहीं हो पाया। नई सरकार ने एक सशक्त, व्यावहारिक और संतुलित मसौदा तैयार किया है। इसमें धर्मांतरण की स्पष्ट प्रक्रिया, पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय की गई है। हमारा उद्देश्य समाज में स्पष्टता, संतुलन और शांति सुनिश्चित करना है। उम्मीद है कि आने वाले विधानसभा सत्र में यह कानून पेश होकर लागू होगा।

सवाल: रेत खनन, गैंगवार और लॉ एंड ऑर्डर पर आप किस तरह अंकुश लगा पाएंगे, क्योंकि इसमें सियासत भी हावी है?

गृहमंत्री- आंकड़ों के आधार पर स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एक भी घटना चिंता का विषय होती है। समाज में धैर्य कम हो रहा है, छोटी बात पर बड़ी घटनाएं हो जाती हैं। कोरबा घटना पुरानी रंजिश, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और व्यावसायिक विवाद का मिश्रण थी। पुलिस ने 24 घंटे में कार्रवाई की और समयबद्ध ट्रायल का लक्ष्य रखा है। कानून का राज हमारी प्राथमिकता है और रहेगा।