26 अक्टूबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

CG Election 2018: फ्लॉप हो रही सरकारी योजनाएं, लुप्त होने के कगार पर बस्तर आर्ट

चुनावी सरगर्मी के बीच कोंडागांव विधानसभा में जब हम पहुँचते हैं तो सरकार का अपना जोर कही नजर नहीं आता। दुनिया भर में विख्यात बस्तर आर्ट यहाँ दम तोड़ रहा है
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Ashish Gupta

•

Updated: 21 Oct 2018, 2:11 PM IST

chhattisgarh polls

CG Election 2018: फ्लॉप हो रही सरकारी योजनाएं, लुप्त होने के कगार पर बस्तर आर्ट

आकाश शुक्ल/कोंडागांव. चुनावी सरगर्मी के बीच कोंडागांव विधानसभा में जब हम पहुँचते हैं तो सरकार का अपना जोर कही नजर नहीं आता। दुनिया भर में विख्यात बस्तर आर्ट यहाँ दम तोड़ रहा है। सड़कें, स्वास्थ्य, अस्पताल, बिजली, शिक्षा आदि मूलभूत सुविधाएं सिर्फ कहने को हैं। कभी शाल वृक्ष के जंगल के नाम से प्रसिद्ध कोंडागांव में अवैध कटाई से शाल का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है । स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर जिला मुख्यालय के शासकीय अस्पताल की स्थिति ऐसी कि लोग वहां इलाज कराना ही पसंद नहीं करते।

पलायन का दंश
एरला पंचायत के चन्दन सिंह, सुकरु राम, पयाम, गोविन्द ने बताया कि मूलभूत सुविधाओं के लिये दिक्कत तो है ही हमारे सामने बेरोजगारी बड़ी समस्या है। मनरेगा सिर्फ मजाक ही बन कर रह गया या तो काम नहीं मिलता, मिल गया तो पैसे ही नहीं मिलते। मजबूरी में कमाने खाने पलायन करना पड़ता है। वहीं शासकीय योजनाओं की बात की जाए तो मुख्यालय से अंदर जाते-जाते ये भी दम तोड़ देते हैं। प्रधानमंत्री आवास, शौचालय के लिये कई बार आवेदन दिया, लेकिन अब तक लाभ नहीं मिला।

न डॉक्टर न ही शिक्षक
स्वास्थ्य की अगर बात की जाए तो गांव के उपस्वास्थ्य केंद्र छोड़ ही दीजिये, मुख्यालय के जिला अस्पताल की स्थिति ही खऱाब है। भोलाराम, नंदू, नागेंद्र ने बताया कि गांव से 80 से 100 किमी तक सफर तय कर यहां इलाज के लिये आते हैं, लेकिन चिकित्सकों की कमी की वजह से ठीक ढंग से इलाज ही नहीं हो पाता। मजबूरी में रायपुर, जगदलपुर जाना पड़ता है। मतलब साफ है, गंभीर स्थिति में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था का खामियाजा आदिवासियों को भुगतना ही पड़ता है। एरला ग्राम के शासकीय शिक्षक आनंद मांडवी ने बताया कि पूर्व माध्यमिक शाला, माध्यमिक शाला मिलाकर सिर्फ दो शिक्षकों के भरोसे दशकों से स्कूल संचालित हो रहे हैं। 8 साल से शिक्षक के लिये आवेदन देते देते थक गए लेकिन कोई शिक्षक नहीं मिला। जहाँ या तो आपको भवन नहीं दिखेंगे दिख भी गये तो, बिना शिक्षक बच्चे एकलव्य की तरह पढ़ते दिखेंगे।

शिल्प कलाकार देख रहे बदहाली के मंजऱ
कोंडागांव में बस्तर आर्ट शिल्प कलाकारों का बहुत बड़ा समूह रहता है। जिसकी संख्या 300 से अधिक है जो सिर्फ बस्तर की कला और संस्कृति को अपने शिल्पकारी से सुशोभित कर रहे, लेकिन आज की स्थिति में उनके पास खुद का कुछ नहीं है। सब्बीर नाग से बातचीत में बताया कि हमारी कलाकृति देश विदेश में छत्तीसगढ़ की संस्कृति को प्रस्तुत करती है लेकिन शासन स्तर पर हमारी उपेक्षा हमेशा से होती रही है। विश्वस्तरीय आर्ट बनाने के बावजूद न सम्मान मिल रहा है न ही उचित मेहनताना। आज स्थिति ऐसी है कि इन कलाकारों के साथ ही इस शिल्पकला पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

रेललाइन है बड़ा मुद्दा
महेंद्र और देव सिंह ने बताया कि सरकार ने पलारी से पुलगांव तक 8 किमी तक बायपास के लिये हरी झंडी दी। जिसके लिये अब तक काम शुरू ही नहीं हुआ। जो यहाँ यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुये बड़ी जरुरत है। इसके अलावा रेलवे लाइन जो नारायणपुर से जगदलपुर यहाँ से होते हुये गुजरेगी। लाखों आदिवासियों को इससे सीधा फायदा होगा, लेकिन मामला भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में ही फसा पड़ा है।