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अंधबिसवास ल झन धरव

खुसी अउ उछाह के तिहार ए

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अंधबिसवास ल झन धरव

बरसाती मउसम म उल्टी-दस्त, मलेरिया, खांसी-बुखार ले लोगनमन पस्त हो जथे। जेती देखबे तेती चिखला माते रहिथे। किसानमन जांगर तोड़त खेती-किसानी के बुता म जुरे रहिथे। पसुधन के सेवा जतन के घलो चिंता रहिथे। तेकर सेती कतकोन किसम के जड़ी-बूटी ल गहूं के पिसान के लोदी बनाके खवाथें।
जन-धन, गाय-गरू के कतकोन नुकसान होगे, होवत हे, फेर नइ चेतत हें। कोनो बीमार परगे त घर-कुरिया ल बइगा करा बंधवावत हे। गाय-गरू, लइका-पिचका ल फूंकवात हे। अस्पताल जाय बर छोड़के बइगा-गुनिया के दुवारी म पहुंच जथें। कतकोन अइसे मनखे हे जेमन बीमारी ल जादू-टोना के नांव धर के माइलोगिनमन ल टोनही-टमनही काहत बदनाम कर देथें।
हरेली साफ-सफई के तिहार आय। ऐला झाड़-फूंक के तिहार नइ बना के अपन गियान ल बढ़ा के सोचे बर चाही। काकरो नजर डीह अउ जादू-टोना कोनो ल नइ लगय, न कोनो ल नुकसान करय। साफ-सफई ऊपर धियान दव, डाक्टर से इलाज करावय, जादू-टोना जइसे अंधबिसवास ल छोड़व। तभे जिनगानी म घलो सावन कस हरियाली आही।
ह मर छत्तीसगढ़ ल जादू-टोना, जंतर-मंतर, बइगा अउ टोनही के गढ़ माने जाथे। हमर परदेस म जादू-टोना के चाल-चलन अड़बड़ हावय। हरेली तिहार ल बइगा-गुनिया, जदुहा, टोनही अउ डायनमन बर बड़ सुभ दिन माने जाथे। इही डर म लोगनमन ह रात-बिकाल के घर ले बाहिर नइ निकलंय। काकरो कांही देय जीनिस ल झोंके अउ खाये-पीये बर डरराथें।
हरेली आय के पहिली अलहन ले बचे बर अपन-अपन घर के देवाल म कोइला अउ गोबर ले देबी-देवता, सेर, गाय, मनखे, डोंगा, संगी-संगवारी अउ आनी-बानी के चिनहा बनाथें। जेकर ले घर म कोनो बाधा-बिधन झन अमावय। ये जम्मो उपाय सिरिफ अंधबिसवास आय। हरेली तिहार के संदेस खुसी अउ उमंग आय।
हरेली ह हिन्दू धरम के सबले सुघ्घर अउ पबरित महीना सावन के सोभा आय। ये तिहार ले जम्मो तिहार-बहार के सिरी गनेस हो जथे। लोगनमन अपन गांव अउ घर-परवार बर सुख समरीधि के आसीरवाद मांगथे। खुसहाली म अंधबिसवास के करिया-करिया अमरबेल के समाज म कोनो जगा नइ होय बर चाही।