
पाैधाराेपण
रोगों व जख्मों को ठीक करने वाले जीवनरक्षक दहमन पौधे का बस्तर में मिलना बेहद सुखद खबर है। क्योंकि, यह पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके पत्ते का लेप बनाकर लगाने से घाव जल्द भर जाते हैं। इससे खून का बहाव भी रुकता है। सर्पदंश व नशा तक उतर जाता है। इतना ही नहीं, माचकोट जंगलों में अनुसंधान के दौरान मिले दहमन के पौधों में एंटी एलरगेसिक, एंटी वेमन, एंटी ऑक्सीडेंट व एंटी माइक्रो बैक्टीरियल के गुण मिले हैं। दहमन के पत्ते ही नहीं, बल्कि उसकी छाल व जड़ भी कई बीमारियों को ठीक करने में कारगर हैं।
सर्वविदित है कि वनों की बेतहाशा कटाई से बस्तर सहित प्रदेशभर के जंगलों में पाए जाने वाले विविध प्रजाति के दुर्लभ औषधीय पेड़-पौधे व जड़ी-बूटियां विलुप्त हो गई हैं या फिर होने को है। जबकि औषधीय पौधों व पेड़ों में छुपी विशिष्टताएं बेहद उपयोगी हैं। बैगाओं, वनवासियों, आदिवासियों और वैद्यों द्वारा उपयोग किए जाने वाले औषधीय पौधों के फल, फूल, जड़ व पत्तियों में रोग दूर करने की क्षमता होती है। फूल-पत्तियों की मदद से बड़ी-बड़ी बीमारियों का इलाज होता है। बावजूद इसके वन विभाग की उदासीनता का आलम यह है कि न तो वनों की सुरक्षा हो पा रही है और न ही जड़ी-बूटियों की। इतना ही नहीं, वन माफिया, तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात तो दूर है, छोटे लकड़ी चोरों पर भी लगाम सरकार नहीं कस पा रही है। ऐसे में दुर्लभ पेड़-पौधे को विलुप्त होने से आखिर वन विभाग कैसे बचा पाएगा?
औषधीय पौधों के ये गुण आज भी उतने ही उपयोगी हैं, जितने सैकड़ों साल पहलेे थे। आज बैगाओं की उपचार विधि का दायरा न केवल वनांचल व ग्रामीण क्षेत्रों में है, बल्कि कई शहरी क्षेत्रों में भी है। लिहाजा, उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली औधषियों की सौ फीसदी प्रमाणिकता के लिए व्यापक रूप में रिसर्च करने की जरूरत है। जिससे वे किसी भी गंभीर बीमारी का उपचार पूरे विश्वास से कर सकें। हमें अपनी परम्परागत वनस्पतियों, जड़ी-बूटियों, औधषीय पौधों से बनी दवाइयों और बैगाओं के ज्ञान को पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण में भुलाना नहीं चाहिए। प्रदेश में न औषधीय पौधों की कमी है और न ही इनके गुणों को जानने वाले बैगाओं की।
बहरहाल, सरकार को दहमन सहित सभी प्रकार के औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन व अनुसंधान के व्यापक और समुचित प्रबंध करना चाहिए। बैगाओं को भी प्रोत्साहित व मदद करना चाहिए। सभी सरकारी अस्पतालों में औषधीय पौधों से इलाज की व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि, जड़ी-बूटियों का अस्तित्व बच सके। आयुर्वेद की पुनस्र्थापना हो सके और इसका लाभ मरीजों को मिले।
Published on:
22 Aug 2018 07:34 pm
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