
छायावाद के प्रवर्तक मुकुटधर पांडेय
छ त्तीसगढ़ अउ देस के नामी कवि, छायावाद के प्रवर्तक, पदमसिरी मुकुटधर पांडेय के जन्म 30 सितम्बर 1885 के वर्तमान जांजगीर जिला के बालपुर चंद्रपुर के तीर म होय रिहिस। ददा पंडित चिंतामणि पांडेय घलो संस्करीति के बड़े जान गियानी अउ भाई म लोचनप्रसाद पांडेय हिंदी भासा के बड़े साहित्यकार रिहिस। अपन आठ भाई म मुकुटधर सबले छोटे रिहिस। गांव के स्कूल म पढि़स। नान्हे उमर म ददा के छइंहा छूटगे तभो ले अपन लिखई बुता ल नई छोडि़स।
उंकर परिवार म ददा घलो बड़े जनिक विद्धवान त वोकर असर लइकामन म परबे करही। पांडेयजी मन आठ भाई रिहिन। पुरुषोत्तम प्रसाद, पदमलोचन, चन्द्रशेसर, लोचन प्रसाद, विद्याधर, बंंसीधर, मुरलीधर, मुकुटधर अउ चार बहिनी चन्दन कुमारी, यज्ञ कुमारी, सूर्य कुमारी अउ आनंद कुमारी।
1909 म 14 साल के उमर म पहली कविता आगरा ल प्रकासित होवइया पत्रि का 'स्वदेस बांधवÓ म छपिस। 1919 म उंकर पहली कविता संग्रह 'पूजा के फूलÓ आइस। देस के सबो पत्रिका म सरलग लिखत हिंदी पद्य के संगे-संग हिंदी गद्य म घलो अपन लिखई ल लंमाइस।
मुकुटधरजी संगीत के घराना रायगढ़ म आके बस गे। ये नगरी ह देस बर संगीत अउ साहित्य के बड़े जनि देन आय। मुकुटधरजी के काव्य संसार अपन ग्रामीन अंचल के भाव भुइंया म सरजीत होइस। पांडेयजी छायावाद के पहली कवि अउ प्रवर्तक, समीक्छक ए। हिंदी के बड़े जान आलोचक आचार्य रामचंद्र सुक्ल अउ जयसंकर प्रसाद घलो छायावाद के पहली कवि मानिस।
पांडेयजी घर म ही हिंदी, अंगरेजी, बंगला, उडिय़ा के बनेच पाठ करे रिहिस। अपन ददा के बनाय स्कूल म पढ़ाइस अउ वोकन सन लेखन के बुता घलो करय। हिंदी काव्य संसार म इंकर लिखे रचना ले एक ठन नवा चेतना जागिस अउ कविता म परेम अउ सौंदरय के भाव बढ़े परिस। व्यक्तिक रागानुभूति के संग रहस्यात्मक प्रवित्ति बढ़े लगिस अउ पद्यात्मकता के जगा प्रतीकात्मक परमुख होत गिस । इही धारा म मैथलीसरन गुप्त अउ जयसंकर प्रसाद घलो आगू बढ़त रिहिस। सरस्वती पत्रिका म पांडेयजी के नांव बिना शुल्क वाले सूची म रहय।
पांडेय जी के 'कुररी के प्रतिÓ काव्य जगत म अमर हो गेहे। अउ बाकी रचना म पूजा के फूल, हृदयगान कहानी संग्रह, परिश्रम निबंध संग्रह, लछमा, सेरबाल, मामा (तीनों अनुदित उपन्यास) मेघदूत, छायावाद व अन्य स्रेस्ठ निबंध, विस्वबोध, स्मृति पुंज परमुख हे। ऐकर अलावा कालिदास जी के 'मेघदूतÓ के छत्तीसगढ़ी अनुवाद घलो करे हे।
छत्तीसगढ़ के पांडेयजी के नाव साहित्य जगत म अब्बड़ मान-सम्मान से ले जाथे। छत्तीसगढ़ के ठेठ मनखे पांडेयजी देस के हिंदी साहित्यिक संसार म उंकर योगदान के कोनो दूसर बराबरी म नइये। जब तक संसार रही तब तक पांडेय के नांव अउ वोकर काव्य के सो चारोंमुड़ा म चंदा अंजोर कस बगरत रइही।
Published on:
26 Nov 2019 04:47 pm
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