
संत कबीरदास अउ बेद-पुरान
कबीर साहेब ल महान संत माने गे हवय। अइसे वोला धरम अउ पाखंड के आलोचक घलो कहे जाथे। कबीर पहिली भारतवासी आय जउन सबो मनखे जात बर एक बरोबर धरम के बखान करे हवय। अंधबिसवास, कुरीति अउ धरम के पाखंड बर भारी ताना मारे हे। कबीर ल सच बोले के सेती सत्य कबीर घलो कहे जाथे। कबीर के जनम अउ जिनगी घलो एक बिचित्र घटना ले कम नइये। मुसलमान घर पालन-पोसन होइस अउ गुरु रामानंद के चेला बनिस। जादा पढ़े-लिखे तो नइ रहिस, फेर जतका परवचन म सुनय वोला मन म धर देवय। अंंतस ले गुनंय अउ अरथ निकाल के मनखेमन ल समझावय। वोकर समे के पंडित, मुल्ला, राजा, मंतरी, मुखिया सब वोकर बिरोधी रहंय।
कबीर बेद ल तो पढ़े नइ रहिस, फेर गुरु अउ परवचनकारमन ले सुन के अपन अलग तरक बताइस। वोकर मन म बेद सास्त्र बर अड़बड़ सरद्धा रहिस। वोमे बताय बने बात ल वोहा स्वीकार घलो करय, फेर जब वोला पंडितमन देवबानी कहे, तब वोकर मति छरिया जाय। बेद-पुरान के आड़ म पंडितमन अपन साधे बर मनखेमन ल उल्टा-पुल्टा बता के डरवांय। ये बात ह कबीर ल नइ भाय। वोकर कहिना रहय कि कोनो अइसे गियानीक हवय जउन संसार के मायाजाल ले लहुट के बेद ल समझे के उदिम करे। पानी म आगी लगे हे अउ अंधरा ह कुछु करत नइये। माने सांत चित आत्मा म बियसन अउ बिकार के आगी लगे हवय अउ मनखे ल दिखत नइये।
है कोई गुरु ज्ञानी,जगत उलटि बेद बुझै।
पानी में पावक बरै, अन्धहिं आँखि न सूझै।।
अइसे कुछझन के बिचार हे कि कबीर ह बेद, कितेब कुरान ल नइ मानंय। फेर, कुछझन कहिथें वो बेद के पक्छपाती करय। हिन्दूमन बेद ल भगवान के बचन कहंय। वइसने मुसलमानमन कुरान ल अल्लाह के बानी कहंय। कबीर कहिथे कि, हिन्दू धरम म बरन बेवस्था, जाति-पाति, भेद-भाव, छुआछूत बेद सम्मत हावय अउ जउन बेद के अनुसार नइ चलही वो नासतिक कहाही। मुसलमानमन घलो इही ल आगू बढ़ात कहिथे कि कुरान के बात नइ मनइया ल नरकगामी अउ बे दीन कहिथे। दूनों के अइसने कहिना हावय तब तो वो सब झूठ हावय।
बेद कितेब दोउ बंद पसारा,
तेहि फंदे परु आप बिचारा।
कबीर जइसन तरकबाज ह बेद अउ कुरान ल भुंइफोर अउ मनगढ़त भगवान के पैदा करे नइ मान सकत रहिस। कागज या लिखाय ल आंखी मुंद के मानेबर तियार नइ होवय। वोहा बिवेक सम्मत ल आंखी देख के मनइया रहिस। कबीर कुरान के सही बात, कुछ मानतमन ल घलो मानय। फेर, हिन्दू रीति-रिवाज, बेद सास्त्र म जादा सरद्धा रखय। कबीर के बीजक ल पढ़े से अइसे समझ आथे कि वो मुसलमान धरम ल थोकिन दूरिहा, माने पार ले देखे हवय अउ हिन्दू धरम म बूड़ के देखे हवय।
कबीर साहेब ह राम-रहीम के नांव लेथे, फेर राम वोकर मुंह म जादा हवय। कतको बिद्वानमन कहिथें कि कबीर तो जादा पढ़े -लिखे नइ रहिस तब बेद-पुरान, कुरान के गुढ़ बात ल कइसे जान सकत हे। ऐकर जुवाब देवत कबीर कहिथे -
मसि कागद छुवों नहीं, कलम गहौं नहिं हाथ। चारिउ युग का महातम, कबीर मुखहि जनाई बात। (साखी 187)
कबीर कहिथे- अपन बात ल जानेबर पढ़े-लिखे के जरूरत नइये। गुरुमन बोलथें वोला कानधर के सुन अउ गुन के लिख। बिद्वानमन के मानना हवय कि कबीर ह बेदाचार्यमन के संगति करे होही। उंकर परवचन ल सुने होही। काबर कि जउन मनखे बेद, पुरान, सास्त्र, स्मरिति, उपनिसद् ल नइ पढ़े होही, नइ समझत होही, वोहा कबीर के रचना गरंथ 'बीजकÓ ला समझेच नइ सकय।
कबीर कहिथे कि बेद-पुरान, कुरान म बने-बने बात हवय। ऐला मंय घलो झूठ नइ कहंव। वोमा लिखाय सबो बात सच आय। फेर, जउन वोला बिना बिचार करे, भगवान के बानी कहिथें, उही झूठ आय। जइसे -
वेद कितेब कहा किन झूठा,
झूठा जो न बिचारे।
कबीर कहिथे कि जतेक ऊंच जगा भगवान के दरसन होथे, जेकर बर रिसी-मुनिमन लाखों बच्छर तप करथें अउ जेकर गुन ल गावत बेद थके नइ, मंय वोकर गियान अउ सिक्छा देथंव, फेर लोगन मोर बात ला नइ मानय।
जाके मुनिवर तप करें, वेद थके गुन गाय।
सोई देउँ सिखापना, कोई नहीं पतियाय।
कबीर आखिर म कहिथे कि जउन परकार के अंधरा बर दरपन के कोई मतलब नइये, वइसने किसम के बिवेकहीन मनखेबर बेद - पुरान, कुरान बेकार आय। अइसने कराही म करछुल फिरत रहिथे, फेर साग के सुवाद अउ रस ल नइ पाय। गदहा ह चंदन लकड़ी के बोझा ल पीठ म लाद के लेगथे फेर वोकर सुगंध ल नइ पावय। वइसने संसार म कतको मनखे हवंय जउन बेद-पुरान, सास्त्र कुरान पढ़े हवंय, फेर वोकर सार तत्व ल नइ जान सकिन अउ आचरन म उतारिन घलो नइ। मनखे परम तत्व ल अगास म खोजथे, फेर अभिमान ल मेटाय वाला वोला मिलय नइ।
कबीर कहिथे, जउन परकार के अंधरा बर दरपन के कोई मतलब नइये, वइसने किसम के बिवेकहीन मनखेबर बेद - पुरान, कुरान बेकार आय। अइसने कराही म करछुल फिरत रहिथे, फेर साग के सुवाद अउ रस ल नइ पाय। गदहा ह चंदन लकड़ी के बोझा ल पीठ म लाद के लेगथे, फेर वोकर सुगंध ल नइ पावय। वइसने संसार म कतको मनखे हवय जउन बेद-पुरान, सास्त्र, कुरान पढ़े हवंय, फेर वोकर सार तत्व ल नइ जान सकिन अउ आचरन म उतारिन घलो नइ।
कबीर बेद ल तो पढ़े नइ रहिस, फेर गुरु अउ परवचनकारमन ले सुन के अपन अलग तरक बताइस। वोकरमन म बेद सास्त्र बर अड़बड़ सरद्धा रहिस। वोमे बताय बने बात ल वोहा स्वीकार घलो करय। फेर, जब वोला पंडितमन देवबानी कहे, तब वोकर मति छरिया जाय। बेद-पुरान के आड़ म पंडितमन अपन साधे बर मनखेमन ल उल्टा-पुल्टा बता के डरवांय। ये बात ह कबीर ल नइ भाय।
Published on:
02 Jun 2020 04:21 pm
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