
फूलबासन बन गे फूल
फूलबासन के गाथा ह रमायनकालीन आय। एक पइत माता जानकी ह अपन सपना के गोठ ल लछमन करा गोठियाथे- हे लछमन मेहा पतरी मा मूंग के दार अउ पसहर चाउर ल खाय हंव अउ फूलबासन नांव के फूल ल देखेंव हंव। लछमन तेहा मोर बर फूलबासन फूल लान देतेय। तोर उपकार ल मेहा कभु नइ भुलातेंव। लछमन ह माता जानकी के गोठ ले सुनके कहिस- हे सीता दाई तेंहा मोला आदेस देहस त वोला मेहा पूरा करिहंव।
माता सीता के आसीस ल पाके लछमन ह जंगल डहर रेंगदिस। भूख-पियास ल भूलागे फूलबासन ल लाय बर। कुलूप अंधियार, जंगल-झाड़ी, नदिया-पहाड़ म खोजे लगिस। आठ दिन अउ नौ रात रेंगत-रेंगत बारह पहाड़ अउ सोलह सेंध के भीतरी म पहुंचिस। उहां गुफा म खुसरिस त वोकर भेंट एकझन जटाधारी जोगी से होइस। जोगी के जटा ह अब्बड़ दूरिया ले बगरे रहिस। लछमन ह वो जटा म फंस गे रहय। धीरज धरके अपन साहस के बूते वोहा जटा ले निकलिस अउ जोगी के सेवा म लगगे। सेवा करत छह दिन बीतगे। त जोगी ह खुस होके लछमन ले कहिस- हे लछमन तोर सेवा ले मेहा बहुत खुस हंव, तेहा मोर कना ले बरदान मांग ले। लछमन कहिस- हे जोगी बबा मोला फूलबासन ल दे दे। जेमा मोर परन ह पूरा हो जही।
जोगी ह लछमन के गोठ ल सुन के कहिस- फूलबासन ल पवई अब्बड़ कठिन हवय। भावरागढ़ के राजा साल केवरा के सातझन नोनी म सबले छोटकुन नोनी फूलबासन आय। मेहा तोर बरदान ल पूरा नइ कर सकंव। तेहा दूसर बरदान मांग ले।
जोगी के गोठ ल सुनके लछमन ह कहिस- जोगी बबा तेहा मोला कोनो उपाय बता देवव जेकर ले मेहा फूलबासन ल पा सकंव। जोगी ह लछमन ल उपाय बताइस- राजा साल केवरा के ये सातो नोनी ह तरिया म नहाय बर रोज जाथें। त छह बहिनीमन वो तरिया के भीतर म बइठ के नहाथें। सातवी नोनी फूलबासन ह आधा रात म तरिया के बीचो-बीच म बुड़ के नहाथे अउ फूल बन जथे। हे लछमन, तेहा उही बीच जाके फूलबासन ल चिनह लेबे अउ उंकरमन के ओनहा ल धर के मोर तीर लान देबे।
लछमन ह जोगी बबा के गोठ ल सुनके भावरागढ़ के तरिया डहर रेंगदिस। उहां जभे सातों बहिनी नहाय बर आइन त छ बहिनी तरिया के तीर म बइठ के नहाय लगिन अउ फूलबासन ह आधा रात म तरिया के बीच म बुड़ के फूल बनगिस। लछमन ह मन म गुनिस अउ चिनहार कर डरिस के इही फूलबासन ए। फेर गम नइ पाइन तइसने सातो बहिनी के ओनहा ल धर के जोगी करा लान दिस।
लछमन के पीछू-पीछू सातो बहिनी दउड़त-दउड़त आइन अउ जोगी करा बिनती करिन के हमर ओनहा ल लहुटा देवव। जोगी ह उंकर ओनहा ल लहुटाय बर मना कर दिस। त दूसर बहिनी ह जोगी करा हाथ जोर के कहिस- हमर ओनहा ल दे देवव वोकर सेती जेन चाही तेन मांग लेवव। त जोगी ह फूलबासन ल मांग डरिस अउ वोकरमन के ओनहा ल लहुटा दिस। फूलबासन ल जोगी करा सउंप के सबो बहिनीमन चलदिन।
जोगी ह लछमन ल फूलबासन ल सउंपिस अउ कहिस- माता सीता ल मोर जय जोहार कहिबे। लछमन ह जोगी करा ले फूलबासन ल पाके अब्बड़ खुस होगे। जभे सब्बो मनखेमन फूलबासन ल देखेबर आय तभे फूलबासन तरिया म समा के फूल बन जाथे। वोकर इही चमत्कार ल देखके सबोझन मोहा जथें।
इही फूलबासन हमर छत्तीसगढ़ी लोकगाथा के कथा हवय। जेमा नारी-परानी के सक्ति अउ गुन के सुवासहर महावत हवंय। फूलबासन अपन गुन अउ चमत्कार ले कभु फूल त कभु नारी बन जथे।
Published on:
08 Jun 2020 04:55 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
