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मनखे के मितान होथे सांप

परब बिसेस

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मनखे के मितान होथे सांप

मनखे के मितान होथे सांप

सा वन महीना के अंजोरी पाख के पंचमी के दिन नाग पंचमी तिहार माने जाथे। ये तिहार म नाग सांप के पूजा करे के रिवाज हवय। वेद पुरान अउ बिग्यान के मुताबिक सांप के जनम मनखे ल नुकसान पहुंचाय बर नइ होय हे, बल्कि सांपमन मनखे बर मितान बरोबर होथे। असली बात तो इही आय कि बिसैला सांप के डर म मनखेमन ह जम्मो किसिम के सांप ल अपन दुसमन मान लेथें। कोनो मनखे ल सांप ह तभे चाबथे जब वोला अइसे लागथे कि मोर जान ऊपर मुसीबत आ गे हे। अइसे बेरा म अपन बचाव करे खातिर सांप ह मनखे ल चाबथे। वइसे सांपमन के आदत सुनसान जगा म रहे के होथे। सांपमन के बचाव अउ खेती के फसल के संगे-संग परयावरन ल बचाय म सांप के योगदान ल देखते नागपंचमी तिहार मनाय के रिबाज सुरू होइस हवय। ए परम्परा ह हमर भारत देस के अलावा दूसर देस म तको चलन म हवय।
हमर देस ह खेती-किसानी वाला देस आए। इहां खेत अउ खेत के उपज धान, गहूं, चना ल नुकसान पहुंचइया मुसवा अउ दूसर कीरा-मकोरा ल खाय के काम सांप ह करथे। माने ए मन ल खाके हमर उपज के बचाव सांपमन करथें। ए अरथ म देखे जाय तो सांप हमर अन्नदाता होथे, काबर कि वोमन ह अन्न ल नुकसान पहुंचइया जीव-जंतुमन ल खाथे।
परयावरन संतुलन म तको सांप के जबर भूमिका होथे। आसाढ़ अउ सावन महीना म रंग- बिरंगा, किसिम-किसम के सांप देखे म मिलथे। काबर कि ए महीना म बारिस के पानी ह सांपमन के पराकिरितिक आवास (बिल, पेड़ के खोह) म भरा जाथे। अइसन दसा म सांप बिचारा बिल के बाहिर ऐती-ओती भटकत फिरथे। इही पाय के सांप चाबे के जादा घटना बरसात के महीना म होथे। ए बात ल सब झन जान लेय बर चाही कि जादातर सांप जहरीला नइ होय। ते पायके सांप ल देखते साथ मार डारे के गलत नियत ल मनखेमन ल छोड़े बर चाही।
नागपंचमी के दिन खास किसम के सपेरामन बांस ले बने पिटारी म सांप ल राखे-राखे घर-घर जाथे अउ बीन बजावत फन काढ़े सांप ल नचाथें। अइसन बेरा म नाग देवता के पूजा करत कईझिन दाई-बहिनी, ददा-भइया मन कटोरी म वोला दूध देथें।बिग्यान के मुताबिक सांपमन दूध नइ पिअय। ते पायके सांप के संग दूध पियाए के खेल करके सपेरामन ह सांप के जान के दुसमन बन जाथे। इहू बात ल जान लेय बर चाही कि सांप देख सकथे, सूंघ सकथे फेर सुने के छमता नइ रहय। सांप के कान नइ होवय। सांप के कान के काम वोकर चमड़ी (त्वचा) ह करथे।