
हरि ठाकुर : गरीब के पीरा जनइया गीतकार
छत्तीसगढ़ी काव्य जगत म हरि ठाकुर परकरीति परेम अउ ओज के कवि के रूप म प्रतिस्ठित हे। छत्तीसगढ़ के हरियर, उपजऊ अउ कई ठन रतन के धरइया भुइंया बर अब्बड़ मया दुलार भरे हे। गांव के किसान-मजदूर के अंतस के पीरा आपमन के गीत म दिखथे। दबे-कुचले गांव के मनखेमन ल जगाय के काम अपन रचना के माध्यम ले करइयाए ठाकुरजी खचित माटी के दुलरुवा बेटा आय।
हरि ठाकुर के जन्म छत्तीसगढ़ के बड़ेजान समाज के सेवा करइया प्यारेलाल गुप्त के घर रइपुर म 16 अगस्त 1927 के होइस। आपमन बीए, एलएलबी तक पढ़ई करके वकालत के व्यवसाय ल अपनाए रेहेंव। अपन ददा के रस्ता ल धरके अजादी के लड़ई म बड़ महत्व के काम करत जूझे रहेव। छत्तीसगढ़ी अउ हिंदी के सबले बड़का गीतकार के रूप म आप स्तापित होयेव। किसान के पीरा अउ जनजागरन आपके कविता के भाव हरे। 30 ले जादा आपके रचना किरिति (कृति) परकासित त अउ चरचित हावय।
छत्तीसगढ़ के इतिहासकार, गीतकार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप म छत्तीसगढ़ राज्य के निरमान म पहली जोरदार काम करे हो। 1942 के आंदोलन ले सुरू होके 1955 के गोवा मुक्ति तक सक्रिय रूप म काम करेव। 1954 नागपुर भूदान पत्रिका साम्ययोग के संपादन ले 1960 के छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्छता अउ 1965-66 संज्ञा मासिक के संपादक 1967-68 साप्ताहिक राष्ट्रबंध, छत्तीसगढ़ राज्य निरमान समिति के संयोजन। 1995 म सृजन सम्मान के स्थापना अउ 2001 के आत ले ऐकर अध्यक्छ पद म रहिके साहित्य के सेवा करेव।
छत्तीसगढ़ी भासा म 8 काव्य परकासित हे। छत्तीसगढ़ी गीत अउ कविता,जय छत्तीसगढ़, सुरता के चंदन, बानी हे अनमोल, धान के कटोरा, धनी धरमदास के पद, सहीद वीर नारायन।
हिंदी म लोहे का नगर, नए विस्वास के बादल, गीतों के सिलालेख, हंसी एक नाव सी, छत्तीसगढ़ के रत्न, छत्तीसगढ़ गाथा, छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक विकास, छत्तीसगढ़ राज्य का प्रारंभिक इतिहास जइसे अब्बड़ रचना हे। कईठन विवि आपके रचना ल अपन पाठ्यक्रम म सम्मिलत करे हें। आप ल कतकोन बड़े-बड़े सम्मान घलो मिले हे।
Published on:
14 Aug 2020 04:33 pm
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