
CG News: समग्र शिक्षा के अधिकारियों की उदासीनता और भर्ती विवादों का असर स्कूलों पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले दो साल से स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के प्रशिक्षक नहीं पहुंच पाए हैं। जानकारों के अनुसार, प्रदेश के 499 स्कूलों में पिछले दो सालों से व्यावसायिक प्रशिक्षक की नियुक्ति ही नहीं हो पाई है। जिससे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है। पिछले वर्ष 652 स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति दी गई थी।
बच्चों ने दाखिला भी ले लिया था, लेकिन यहां एक भी प्रशिक्षक की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही भ्रष्टाचार और धांधली की शिकायतों के चलते प्रक्रिया आधी-अधूरी ही छाेड़ दी गई। जिसके कारण काफी सारे स्कूलों में भर्ती नहीं हो पाई। इसके चलते बच्चों को रोजगारोन्मुखी और हुनरमंद बनाने की केंद्र सरकार की व्यावसायिक शिक्षा योजना कागजों में ही दिखाई दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच के बाद ही भर्ती प्रक्रिया आगे हो पाएगी।
फंड का भी नहीं कर पा रहे उपयोग
राज्य की शिक्षा व्यवस्था की खामियां भी दिखाई दे रही हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन और आवंटित निधि के उपयोग में आई सुस्ती ने व्यवस्था की कमजोरियां उजागर की हैं। योजना के संचालन व क्रियान्वयन के लिए तो लगातार करोड़ों रुपए फंड मिल रहा है, लेकिन समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ इसका उपयोग नहीं कर पा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में जहां 19371.87 लाख रुपए से ज्यादा का फंड मिला, लेकिन अब तक 100 करोड़ भी उपयोग नहीं हो सका। वहीं पिछले सत्र में 18395.16 मिला था जिनमें से 4403.84 लाख ही उपयोग किया जा सका। इसके साथ ही राज्य में कौशल शिक्षा के लिए अनुमोदित स्कूलों की संख्या 1284 है, लेकिन 1183 स्कूलों में ही कार्यान्वयन किया जा सका है।
पूर्व-व्यावसायिक अनुभव लेने के लिए बढ़ रहे छात्र
शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के स्कूलों में पूर्व-व्यावसायिक अनुभव एवं बैगलेस डेज में छात्र-छात्राओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है। सत्र 2021-22 में जहां मात्र 560 छात्र इस योजना से जुड़े थे, वहीं 2023-24 में यह संख्या 20,329 तक पहुंची। सबसे बड़ा उछाल 2024-25 में दर्ज हुआ, जब कुल 28 लाख छात्र इस पहल के दायरे में आ गए। यह आंकड़ा बताता है कि स्कूलों में सैद्धांतिक शिक्षा से आगे बढ़कर प्रायोगिक और कौशल आधारित सीखने पर गंभीर काम शुरू हुआ है।
विशेषज्ञों देते हैं प्रशिक्षण
शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार, समग्र शिक्षा के नवाचार घटक के तहत कक्षा छठी से 8वीं के विद्यार्थियों के लिए पूर्व-व्यावसायिक अनुभव प्रदान करने में सहायता की जाती है। इस चरण में कौशल शिक्षा का अनुभव विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी-संबंधी कौशल का पता लगाने में सक्षम बनाता है और उन्हें सूचित विषय विकल्प चुनने में सहायता करता है।
कौशल प्रदर्शन के लिए विद्यार्थियों के लिए 10 दिवस की बैगलेस अवधि के दौरान विद्यार्थी कारीगर, बागवानी और शिल्पकार जैसे स्थानीय विशेषज्ञों से प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। कौशल शिक्षा घटक के तहत, कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा के तहत कौशल पाठ्यक्रम प्रदान किए जाते हैं। माध्यमिक स्तर पर यानी कक्षा 9वीं और 10वीं में विद्यार्थियों को एक अतिरिक्त विषय के रूप में कौशल पाठ्यक्रम प्रदान किए जाते हैं। कक्षा 11वीं और 12वीं कौशल पाठ्यक्रम अनिवार्य (वैकल्पिक) विषय के रूप में प्रदान किए जाते हैं।
इनका कहना है
भर्ती प्रक्रिया में शिकायत आने के बाद से भर्ती प्रक्रिया बंद है। अभी उसकी जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी।
डीके कौशिक, उप संचालक, समग्र शिक्षा
Updated on:
15 Jan 2026 02:07 am
Published on:
15 Jan 2026 01:00 am
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