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‘छन्द झरोखा’ म समाय हे जिनगी के सार

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‘छन्द झरोखा’ म समाय हे जिनगी के सार

‘छन्द झरोखा’ म समाय हे जिनगी के सार

विगत तीन चार बछर ले छत्तीसगढ़ी म सरलग छन्द लेखन होवत हे। जेमा 100 ले आगर छन्दकार महतारी भाखा ल पोठ करे के काम करत हवय। युवा छन्दकार रामकुमार चन्द्रवंसी के पहिली किरिति ‘छन्द झरोखा’ पढ़े बर मिलिस। ऐमा 65 किसम के छन्द के परयोग कवि ह करे हवय। सुरुआत सरस्वती वंदना से हे जेन त्रिभंगी छंद म हे।
सबले जादा रचना घनाछरी अउ सवैया छन्द म हवय। जेमा 7 किसम के घनाछारी अउ 13 किसम के सवैया हवय। ऐेकर अलावा त्रिाभंगी, कुंडलिनी, उपेन्द्रवज्रा, सारवती, सीता, दोधक, वसन्ततिलका, चंचरी, ताटक, सिंगार, छन्द विजात, सिंधु, कज्जल, कहमुकरी, राधिका, विधाता, सोभन, रूपमाला, गीता, आल्हा, सगुन, प्लवंनगम, दिगपाल, मरहठा, रजनी, पीयूस वर्स, सक्ति, उल्लाला, त्रिभंगी, अमरित ध्वनि, सार, छन्द मनोरम, मुक्तामनि, लावनी, ताटक, कुकुभ, मधुमालती, पादाकुलक, सरसी, गीतिका, हरिगीतिका, छप्पय अउ कुंडलिया छन्द हवय।
छन्द लेखन के ज्यादातर बिसय पारंपरिक हवय। जेमा गियान, जीवन दरसन, परभु आराधना, दान, परहित, हार-जीत, सुख-दुख, मेहनत, देसपरेम आदि। अभु के समसिया जइसे - जल संरक्छन, परयावरन, प्लास्टिक के बेतरतीब उपयोग, किसान के चिंता, नसा अउ महंगई ऊपर घलो कवि अपन कमल चलाय हवय।
छत्तीसगढ़ी छन्द म जोरदार काम होत हे
दोहा छन्द के बानगी देखव.
भुइंया सुन्ना रुख बिना,
तुलसी बिना दुवार।
कोठा सुन्ना गउ बिना,
बेटी बिन संसार।
आल्हा छन्द म कवि के चिंता परयावरन बर हे।
सुनव-सुनव जम्मो नर नारी, करलव बेरा रहत विचार।
काट कभु झन करव नदानी,
रुख हावय तब हे संसार।
बेहतरीन उल्लाला छन्द देखव।
दौलत वो का काम के,
राखे गठरी बांध के।
लइका जस घरघुंदिया,
खाय कभु ना रांध के।
आज के समे म एक डहर छत्तीसगढ़ी ल खराब करे जावत हे, दूसर डहर छन्द म सानदार काम घलो चलत हवय।