
छत्तीसगढ़ी नाचा के महान पुरोधा दाऊ मंदराजी
दाऊ दुलार सिंह मंदराजी के जनम 1 अप्रैल 1910 के रवेली गांव म मालगुजार परिवार म होइस। मंदराजी नानकुन ले नाच-गान म अड़बड़ मया अउ लगाव रिहिस। उन समे गांव-गांव म ‘खड़े साज के बोल.बाला रिहिस। खड़े साज या मसाल लेके मसलहा नाचा’ करे के समे रिहिस। मंदराजी नाचा के मंचीय बिकास के जात्रा म अड़बड़ योगदान दिस। वोमन अपन प्राथमिक सिक्छा बछर 1922 म पूरा कर ले रिहिस। गांव म जउन लोक कलाकार रिहिन तेकर संग म रहिके मंदराजी चिकारा, हारमोनियम अउ तबला सीख गिन। वोमन गांव के सबो धारमिक अउ सामाजिक कारयकरम म घलो भाग लेवत रिहिन।
दाऊ मंदराजी जेमन छत्तीसगढ़ी लोक नाट्य नाचा ला नवा रूप म पिरोके दरसकमन के आगू रखिन। नाचा ल सामाजिक जागरुकता बर एक बड़े मंच बनाइन। नाचा ले ही देस म अजादी की अलख जगाइन। नाचा ले ही अइसे लोक कलाकार के टीम तइयार करिन जेमन देस दुनिया जाके छा गिन। नाचा ले ही छत्तीसगढ़ के लोककला ल बिस्वभर म अमर कर दिन।
दाऊ मंदिराजी ह नाचा ले ही छत्तीसगढ़ के लोक संस्करीति ल जिंदा रखे अउ वोकर सुग्घर संरक्छन बर अपन तन-मन-धन ल समरपित कर दिन। जिनगी के आखिरी पहर गुमनामी अउ गरीबी म गुजारिस, फेर वोमन जिनगीभर नाचा ला बढ़ाय के काम करिन।
24 सिंतबर 1984 के दिन नाचा के ये महान सरजक मंदराजी अपन देह ल छोडक़े कला संसार ल सुन्ना करके सरग चल दिन। छत्तीसगढ़ सासन ह वोमन के सुरता म लोक कलासिल्प बर दाऊ मंदराजी सम्मान के स्थापना करे हे।
गम्मत से सामाजिक जागरुकता जगइस
दाऊ मंदराजी के नाचा पारटी के सबले बड़े बिसेसता ये रिहिस कि वे हास्य अउ लोक गीत-संगीत के बीच सामाजिक बात म अपन प्रस्तुति देवय। जइसे कि वो समे म नाचा के माध्यम ले सराबबंदी, बहुपत्नी परथा, बिहाव म बेमतलब खरचा, सामंतवाद, ढोंग, देसभक्ति जइसे बिसय ल मनखेमन के आगू रखय। मंदराजी बाल बिवाह, परवार नियोजन, छुआछूत, परियावरन, सिक्छा, सुवास्थ अउ औद्योगिकीकरन के बिसय म समाज ल जगाय के सुग्घर परयास करय। लोक विधा-नाचा ल जिंदा रखइया, लोक कलाकार ल आसरा देवइया दाऊ मंदिराजी के जिनगी अउ काम ह आज समाज ल जगाय अउ नाचा ल बढ़ाय के रद्दा देखाथे।
Published on:
06 Apr 2021 11:34 pm
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