
धनी धरमदास : छत्तीसगढ़ म कबीरपंथ के अलख जगइया
धनी धरमदास जी सिरी सद्गुरु कबीर साहेब के परमुख सिस्य रहिन। कबीर पंथ के बडे साखा-छत्तीसगढ के संस्थापक घलो रहिन। कबीर साहेब के पद के संकलन अउ संरकछन करे के काम ल धनी धरमदासजी ह करे रहिन। धनी धरमदासजी के जनम बछर 1472 माने 1416 ई. के कातिक महीना के तीसवां दिन माने पुन्नी के दिन, बांधवगढ के कसौंधन वैस्य परिवार म होय रहिस। वोकर ददा के नाव मनमहेस अउ महतारी के नाव सुधमारवती रहिस।
धरमदास के बचपना के नाव जुडावन रहिस। बड़े होइस त वोकर बिहाव आमिन देवी के संग होय रहिस। धनी धरमदासजी ह बडक़ा मनखे अउ बइसनव गिरहस्थ के रहिन। उंकर गुरु के नाव ़रूपदास रहिस। फेर कबीर साहब ले भेंट होय के बाद निरगुन भक्ति धारा म बुडग़े। कबीर साहेब सन उंकर पहली भेंट मथुरा म होय रहिस। उहां ले लहुट के एक बछर गिरहस्थ जीवन बिताए के बाद कासी चल दीन। उहां कबीरदास ले विधिवत सिक्छा लिस।
धनी धरमदासजी ह अपन कतको पद म खुद ल कबीर साहेब के सिस्य बताए हे। पंथ के वोकर गरंथ म घलो ये बात के पुस्टि होथे। छत्तीसगढी सब्द अउ गीतसैली ल धरमदासजी ह अपन काव्य म परमुख जगा दे हवय। अपन धारमिक गतिविधि बर वोहा छत्तीसगढ़ ल चुने रहिन। उंकर एही बिसेसता रहिन के छत्तीसगढ़ ल वोकर समग्रता ले अपनाए रहिस।
छत्तीसगढ़ के लोक भाखा, लोक संस्करीति अउ लोक परंपरा ल तको अपनाए रहिन। ऐही सेती के धरमदासजी ल छत्तीसगढ़ के पहिली कवि कहे जाथें। धनी धरम दास कबीरपंथ के छत्तीसगढ़ साखा के संस्थापक आवय। कबीर साहेब के पद के संकलन अउ वोला लिपीबद्ध करे के स्रेय धनी धरमदास जी ल जाथे।
धनी धरमदासजी ह आध्यात्मिक चेतना के बिस्तार बर उच्च वर्ग ल नइ, सोसित, दलित, अउ पीडि़त सर्वहारा वर्ग ल चुने रहिस। धरमदासजी ह कबीर पंथ ल पंथ के रूप म ठोस आधार म चिंतन बर परचुर साहित्य देइन। ऐकर सेती कबीर पंथ के छत्तीसगढ़ साखा ह देसभर म नइ, बिदेस म घलो परसिद्ध होके मजबूती ले स्थापित होइस। संत कबीर साहेब ह जेन काम ल देसस्तर म करिन वो काम ल धनी धरमदासजी ह छत्तीसगढ़ स्तर म करिन। धनी धरमदासजी के बिसेसता ये रहिस के वोहा परचार बर छत्तीसगढ़ के जनभाखा ल अपन माध्यम बनाए रहिस।
Published on:
24 May 2021 04:29 pm
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