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दक्छिन भारतीय छत्तीसगढिय़ा डॉ. हनुमंत नायडू

सुरता म

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दक्छिन भारतीय छत्तीसगढिय़ा डॉ. हनुमंत नायडू

दक्छिन भारतीय छत्तीसगढिय़ा डॉ. हनुमंत नायडू

स्व. डॉ. हनुमंत नायडू हमर परांत के बडक़ा साहित्यकार हरे, जउन ह हिंदी अउ छत्तीसगढ़ी भाखा के खास जानकार रिहिस हे। वोहा तेलगू भाखा वाला होके घलो ठेठ छत्तीसगढिय़ा रिहिस। छत्तीसगढ़ के लोकगीत म सोध करे रिहिस।
मनु नायक ह छत्तीसगढ़ी म पहिली फिलिम ‘कहि देबे संदेस’ बनाइस। ये फिलिम के गीत डॉ. हनुमंत नायडू ह लिखे रिहिस। वोकर लिखे गीत ह आज ले सबके जुबान म हवय। ये फिलिम म लिखे गीत ल देस के परसिद्ध गायक-गायिकामन गाए रिहिन।
स्व.मो. रफी- झमकत नदिया बहिनी लागे, तोर पैरी के छुनर-छुनर। स्व. महेन्द्र कपूर के ददरिया- हो रे होरे। मीनू पुरुसोत्तम के सुआगीत- तारी-नारी नाहना अउ बिहिनिया के उगत सुरूज देवता। सुमन कल्यानापुर के बिदाई गीत- मोरे अंगना के सोन चिरैया ओ नोनी। स्व. मन्नाडे- दुनिया के मन आगू बड़ गेइस।
डॉ. नायडू के जनम 7 अपरैल 1933 के होइस। वोकर ददा स्व. एस.एस. नायडू ह सिंचाई विभाग ुृदुरुग म करमचारी रिहिस। डॉ. हनुमंत नायडू के सिक्छा, पढ़ई-लिखई दुरुग होइस। तेलगू भाखा वाले परिवार म रहिके वोहा हिंदी म एम.ए. अउ पी.एच.डी. करिस। वोहा पढ़ई-लिखई म गजब होसियार रिहिस। पहली वोहा दुरुग के सरकारी इस्कूल म अध्यापन करिस। बाद म अपन हुनर ले वोहा मुम्बई के एल्फिंसटन कालेज म हिंदी के व्याख्याता हो गे। कोल्हापुर के महाविद्यालय म घलो अध्यापन करिस। बाद म नागपुर विस्वविद्यालय म अध्यापन करत वोहा रिटायर होगे। नागपुर म बसंत राव नाइक, कला अउ बिग्यान संस्था म सेवा करिस।वोहा सैकड़ों गीत, गजल, व्यंग लेखन करिस- जलता हुआ सफर, मेरी गजल मसाल है (गजल संगरह), नीला अम्बर साथी मेरा (बाल साहित्य), तकधिना धिन- (व्यग्य संगरह)। अपन जीयत भर ले देस के पत्र-पत्रिका म खूब लिखिस। वोकर सोध के बिसय रिहिस छत्तीसगढ़ी लोकगीतों का लोकतात्विक अउ मनोबिग्यानिक अनुसीलन, जेमा घलो छत्तीसगढ़ बर वोकर धियान झलकथे।
डॉ. हनुमंत नायडू ह ये सिद्ध कर दिस कि कोनो भी परांत के मनखे छत्तीसगढिय़ा हो सकत हे। अमरीका अउ रूस के रहवइया घलो छत्तीसगढिय़ा हो सकत हे। माने जउन ह छत्तीसगढ़ के धरती अउ छत्तीसगढ़ी भाखा ल परेम करथे वोहा छत्तीसगढिय़ा हरे। डॉ. हनुमंत नायडू ह छत्तीसगढ़ी भाखा ल अजर-अमर करके 25 फरवरी 1998 के परलोक सिधार दिस।