
छत्तीसगढ़ में 31 जनवरी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी सरकार करेगी। कार्यदिवस के हिसाब से धान खरीदी में 9 दिन ही शेष बचे हैं और इन 9 दिनों में 8 लाख 78 हजार 104 किसानों का धान खरीदा जाना है। उधर, धान खरीदी केंद्रों में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं क्योंकि केंद्रों में खरीदे गए धान को रखने की पर्याप्त जगह नहीं है और खरीदे गए धान का उठाव भी नियमित नहीं हो रहा है। करीबन 43 प्रतिशत खरीदी केंद्रों में स्टॉक लिमिट से ज्यादा हो गया है। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि 2740 धान खरीदी केंद्रों में से 1184 केंद्रों में स्टॉक बफर लिमिट से ज्यादा हो चुका है। इस वजह से उन केंद्रों द्वारा धान खरीदी बंद कर दी गई है। सरकार द्वारा अन्नदाता की उपज का हर एक दाना खरीदने के दावे के बीच खरीदी बंद करने से किसान आक्रोशित हैं। नीचे बस्तर से लेकर रायपुर और ऊपर सरगुजा तक किसान जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। कोंडागांव में तो किसानों ने धान खरीदी नहीं करने की वजह से नेशनल हाईवे पर कई घंटों तक प्रदर्शन किया। इस दौरान कई किलोमीटर तक यातायात प्रभावित हो गया। जबकि खाद्य सचिव और मार्कफेड के मुताबिक हालात सामान्य हैं, कहीं कोई परेशानी नहीं है। खरीदी प्रक्रिया सामान्य करने के लिए अतिरिक्त संग्रहण केंद्र भी शुरू किए जा रहे हैं। इस बीच, सरकार ने धान खरीदी को लेकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है, जिसके मुताबिक 13 जनवरी तक 17 लाख 77 हजार 419 किसानों से 105.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है और किसानों को 23,448 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड राशि का भुगतान किया गया है। यह अब तक के सभी वर्षों की तुलना में 13 जनवरी तक की सबसे अधिक खरीदी और सबसे अधिक भुगतान है। सरकार की उपलब्धि और दावे अपनी जगह है तथा किसानों की परेशानी और जमीनी हकीकत अपनी जगह है। सरकार को चाहिए कि धान खरीदी के शेष बचे 9 दिनों को युद्ध स्तर पर ले और ऐसी व्यवस्था करे कि अन्नदाताओं को कोई परेशानी न हो। साथ ही खरीदी की तारीख को भी बढ़ाए।
-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
Published on:
16 Jan 2026 02:30 am
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