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स्वतंत्रता सेनानी स्व. सुंदरलाल फुलझेले ह जिनगीभर करिस समाज उत्थान के काम

सुरता म

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स्वतंत्रता सेनानी स्व. सुंदरलाल फुलझेले ह जिनगीभर करिस समाज उत्थान के काम

स्वतंत्रता सेनानी स्व. सुंदरलाल फुलझेले ह जिनगीभर करिस समाज उत्थान के काम

करो या मरो, अंगरेज भारत छोड़ो नारा ह 1942 म करांतिकारीमन के रग-रग म बस के रिहिस। मध्य भारत के स्वतंत्रता आंदोलन म ‘रायपुर सड्यंत्र केस’ सबले जादा चरचित हे। बम अउ पिस्तौल बनाय के आरोप म परसराम सोनी अउ वोकर संगीमन गिरफ्तार होय रिहिन। जेमे भाग लेवइया कम उमर के सुंदरलाल फुलझेले घलो रिहिस हे। सुधीर मुखरजी, दसरथ चौबे, रनवीर सास्त्री, भूपेन्द्रनाथ मुखरजी अउ दूसर नेतामन के सहभागिता रिहिस।
15 बछर के उमर म सुंदरलाल फुलझेले ह अंगरेजमन ले छुपत-छिपावत स्वतंत्रता के जुलूस म सामिल होवत रिहिस। वो अउ वोकर संगवारीमन स्कूल नइ जाके आजादी के झंडा लेके नारा लगावंय। बछर 1900 म रायपुर सहर छोटकुन रिहिस। वो समे रायपुर म मुख्य आबादी सदर बाजार, पुरानी बस्ती, तात्यापारा, नयापारा, रामसागरपारा म उच्च जात के लोगनमन रहंय। वो समे सामाजिक परथा के मुताबिक अनुसूचित जाति के बस्ती सहर के बाहिर जगा म बसे रिहिस, जउन बांस टाल वार्ड कहावत रिहिस। जउन बाद म बांसटाल अस्पताल वार्ड होगे, जो आज तक हे।
उही बस्ती म मारूतीराव अउ कचरीबाई फुलझेले के घर एक अगस्त 1918 म सुंदरलाल फुलझेले के जनम होइस। 8 जुलाई 1935 म सेंटपाल हाईस्कूल म कक्छा नवमीं म भरती होइस। घेरी-बेरी स्वतंत्रता आंदोलन म भाग ले, स्कूल नइ जाय अउ फीस नइ पटाय के सेती कक्छा ग्यारहवीं म 2 जुलाई 1938 म स्कूल छोड़े बर परिस। उही समे 1942 म कांगरेस के बड़े करांतिकारी नेतामन संग काम करत रिहिस। वोहा सचिव बने के बाद रायपुर सहर के कांगरेस के उपाध्यक्छ बनिस। वोहा कांगरेस के कारयकरम म 6 नवंबर 1994 के भोपाल गे रिहिस, उहां बस से वोकर एक्सीडेंट होगे, अउ वोहा बच नइ पाइस।
स्वतंत्रता सेनानी सुंदरलाल फुलझेले के रुझान सदा समाज अउ वंचितमन के उत्थान बर राहत रिहिस। स्वतंत्रता आंदोलन म भाग लेय के बाद वोहा अनुसूचित अउ पिछड़ी जाति के लोगनमन के बीच कांगरेस के सदस्य होय के नाते बइठक लेवत रिहिस। भारतीय बौद्ध समाज के रायपुर सहर के अध्यक्छ पद म रहत बस्ती के बीच बौद्ध मठ बनाय बर अउ अपन महतारी कचरीबाई फुलझेले के सुरता म भगवान बुद्ध के मूरति दान दे रिहिस। मोहल्ला म पक्की सडक़, नाली अउ पीये के पानी बर परसासन से जूझत रहय। बुलाकीलाल पुजारी, सारदाचंद्र तिवारी के सहयोग ले 1970 म भंगी, मेहतरमन बर पक्का मकान बनाय रिहिस।