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जिनवाणी को चिंतन, मनन व आचरण में उतारें : शुभंकराश्रीजी

भगवान पाश्र्वनाथ के साथ गाजे बाजे, जय जयकारों के साथ हमने चातुर्मास के लिए नगर प्रवेश किया। प्रतिदिन स्वाध्याय प्रवचन व धर्मचर्चा के माध्यम से जिनवाणी को समझाने का प्रयास चार माह तक निरंतर किया। अब उसे चिंतन, मनन कर आचरण में उतारने का प्रयास सभी को करना है। स्थानीय श्वेताम्बर जैन मंदिर प्रांगण में सोमवारको कृतज्ञता अर्पण समारोह में उक्त बातें नवकार जपेश्वरी शुभंकरा श्रीजी ने कही।

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जिनवाणी को चिंतन, मनन व आचरण में उतारें : शुभंकराश्रीजी

जिनवाणी को चिंतन, मनन व आचरण में उतारें : शुभंकराश्रीजी

नवापारा राजिम। भगवान पाश्र्वनाथ के साथ गाजे बाजे, जय जयकारों के साथ हमने चातुर्मास के लिए नगर प्रवेश किया। प्रतिदिन स्वाध्याय प्रवचन व धर्मचर्चा के माध्यम से जिनवाणी को समझाने का प्रयास चार माह तक निरंतर किया। अब उसे चिंतन, मनन कर आचरण में उतारने का प्रयास सभी को करना है। स्थानीय श्वेताम्बर जैन मंदिर प्रांगण में सोमवारको कृतज्ञता अर्पण समारोह में उक्त बातें नवकार जपेश्वरी शुभंकरा श्रीजी ने कही।
उन्होंने आगे कहा कि चातुर्मास में समय-समय पर आत्मा को निर्मल बनाने के लिए पूजन-महापूजनों के कई आयोजन हुए। 68 दिवसीय नवकार दरबार लगा। शुभारंभ से समापन तक का आयोजन सुंदर ढंग से संपन्न हुआ। इन आयोजनों में लाभार्थी परिवारों के साथ तन, मन, धन से सहयोग करने वालों का भी बहुत-बहुत आभार। सतत चार माह भोजन व आवास व्यवस्था में जुटे सभी का कार्य प्रशंसनीय रहा। इन चार माह में किसी भी प्रकार की त्रुटियों के लिए उन्होंने श्रीसंघ से क्षमा मांगी।
जिसका सर्जन, उसका विसर्जन : साधी सुभद्रा श्रीजी
जिस चीज का सर्जन होता है, उसका समयानुसार विसर्जन भी होता है। चातुर्मास भी ऐसी ही व्यवस्था है। चातुर्मास के लिए चार माह के लिए संघ में स्थिरता रही। अब चार माह के बाद विहार करना ही है। जैसे पानी बहता हुआ ही शुद्ध रहता है। एक जगह इक_ा हुआ पानी जल्दी गंदा हो जाता है, श्रमण परम्परा भी इसी प्रकार की है। चार माह में हमने धर्म के मर्म को समझाने का प्रयास किया है, जिन्हें जो अच्छा लगे ग्रहण करना है और जो अच्छा न लगे उसे हमारी झोली में डाल देना है। उक्त बातें पू. सुभद्रा श्री म. सा. ने कही। आपने कहा कि ऋषि, महर्षियों व गुरुवर्या श्रीजी की वाणी को प्रवचन के माध्यम से आप तक पहुंचाया है। उस पर अमल करना, प्रतिदिन पूजा पाठ, सामायिक, प्रतिक्रमण के माध्यम से उपाश्रय को चलायमान रखना। संपूर्ण श्रीसंघ वटवृक्ष के समान है। परस्पर मैत्रीभाव व संगठन में प्रेम के साथ सबका सहयोग करता है, तभी संघ को ऊपर उठने में मदद मिलेगी। परस्पर विवाद से वैमनस्य पैदा होता है। संघ खंडित होता है। त्रिवेणी संगम के तट पर बसी यह नगरी धर्म ध्यान के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ती रहे यही हमारी मंगल कामना शुभ भावना है। चातुर्मास के दरम्यान हमारे द्वारा किसी की भी भावना को ठेस पहुंची हो इसके लिए सभी से क्षमा चाहते हैं।
संस्थाओं द्वारा कृतज्ञता अर्पण स्थानीय श्रीसंघ की विभिन्न संस्थाओं द्वारा चातुर्मास के लिए कृतज्ञता ज्ञापित की गई। जैन श्रीसंघ व बिहार सेवा ग्रुप की तरफ से अभिषेक दुग्गड़ ने अपनी भावना रखी। वहीं, मनोहर बहुमंडल, अर्हम बहुमंडल, जैन पाठशाला, नवकार ग्रुप, गुरुदेव भक्त मंडल ने भी अपने विचार रखे।आभा बंगानी ने अपने उद्बोधन में साध्वी त्रय के गुणों का बखान किया व अपनी व श्रीसंघ की तरफ से साध्वी मंडल के प्रति आभार व्यक्त किया। जिन्होंने इतना सुंदर चातुर्मास का अवसर श्रीसंघ को दिया। इसी समारोह में विशेष सहयोग के लिए सभी मंदिर कर्मचारियों का स्वागत किया गया। तिलक तप के तपस्वियों का भी श्रीसंघ की तरफ से बहुमान किया गया।
पत्रकारों का हुआ बहुमान
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकार हुआ करता है, जो अपनी लेखनी के माध्यम से किसी भी आयोजन को समाचार पत्र के माध्यम से समाज के सामने रखता है। स्थानीय श्वेेताम्बर जैन मंदिर प्रांगण में आयोजित सभी कार्यक्रमों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने में सहयोगी स्थानीय पत्रकारों का भी सम्मान किया गया। अभिषेक दुग्गड़ ने बताया समारोह में वरिष्ठ पत्रकार रमेश पहाडिय़ा, विनोद जैन व मनीष जैन का सम्मान संघ के वरिष्ठ सदस्य मोतीलाल दुगड़, हेमराज पारख, लालचंद बंगानी, शांति झाबक, सुनील बंगानी, अजय कोचर आदि ने तिलक व मोमेन्टों प्रदान कर किया। सभी पत्रकारों को पूज्य साध्वीजी ने मांगलिक हल्दी, भक्तामर पूजन, मंत्रिक गंधोधक जल व वासक्षेप डालकर अपना मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
पाश्र्वनाथ भक्ति व मंगल विहार
सोमवार को भगवान पाश्र्वनाथ भक्ति का लाभ जवाहरलाल सुमित कोचर परिवार ने लिया। रात्रि में भक्ति भावना का कार्यक्रम कोचर सदन में किया गया। 8 नवंबर को प्रात: 5 बजे साध्वी वृदों के मुखार वृंद से मंदिर प्रांगण में शत्रुंजय रास व भक्तामर पाठ के बाद के गाते-बाजते प्रभु पाश्र्वनाथ की प्रतिमा के साथ राजिम की ओर विहार होगा। राजिम मंदिर प्रांगण में कार्तिक पूनम की विधि होगी। इसके बाद दारा गुरुदेव की पूजा होगी। नवकारसी का लाभ राजिम श्रीसंघ को, गुरुप्रसादी सोनराज अजय कोचर परिवार द्वारा रखी गई है। कार्यक्रम का संचालन पायल बाफना ने किया।