जैन भवन में चातुर्मासिक प्रवचन में गणिनी आर्यिका सौभाग्यमती माताजी ने कहा कि दुनिया में वे लोग बड़े सौभाग्यशाली हैं, जिन्हें आए दिन गुरु का समय .गुरु का सत्संग. गुरु के पास, गुरु के समीप, गुरु के निकट बैठने का सौभाग्य मिलता है। दुनिया में कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें चरण तो दूर चरण रज भी नहीं मिलती है। गुरु को निहारना तो दूर गुरु की छाया भी नहीं मिलती। गुरु का सानिध्य एक मौका है।
नवापारा राजिम। जैन भवन में चातुर्मासिक प्रवचन में गणिनी आर्यिका सौभाग्यमती माताजी ने कहा कि दुनिया में वे लोग बड़े सौभाग्यशाली हैं, जिन्हें आए दिन गुरु का समय .गुरु का सत्संग. गुरु के पास, गुरु के समीप, गुरु के निकट बैठने का सौभाग्य मिलता है। दुनिया में कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें चरण तो दूर चरण रज भी नहीं मिलती है। गुरु को निहारना तो दूर गुरु की छाया भी नहीं मिलती। गुरु का सानिध्य एक मौका है। जीवन को जीवन्त करने का नर से नारायण, पशु से परमेश्वर, कंकर सें शंकर, तीतन से तीर्थकर बनने का। राग से विराग की और भोग से योग की ओर, मोह से मोक्ष की ओर, मंडी से मंदिर, असत्य से सत्य, अधर्म से धर्म, पतन से उत्थान, अतिक्रमण से प्रतिक्रमण की ओर बढऩे का यह मौका है।
उन्होंने कहा कि भक्त से भगवान बनने का गुरु का सानिध्य स्वाति नक्षत्र में होने वाली वर्षा के समान है। वह अमृत की वर्षा रोज नहीं बरसती, बड़ी मुश्किल से होती है। कहीं ऐसा न हो जाए, सीप तुम्हारी बंद ही रह जाए। सीप के ऊपर अमृत की बूंद गिरे और वह ढह जाए। परमात्मा बूंद,तुम्हारे ऊपर गिरे की बूंद गुरु के प्रेम की बूंद तुम्हारे ऊपर गिरे और तुम्हारे हृदय कमल तक न पहुंच पाए, तुम्हारे अन्तस को न छू पाए, तुम्हारे अन्तरमन को न भिगो पाए, यदि तुम उस अमृत की बूंद को न पी पाए तो तुमसे बडा अभागा इस दुनिया में नहीं। नगर में वर्षा हो और तुम्हारा घर सूखा रह जाए, तुम्हारा घड़ा खाली रह जाए, इसलिए अपने ह्रदय कमल को खोल कर रखना नहीं तो गुरु का सानिध्य व्यर्थ चला जाएगा। गुरु व सत्संग के अलावा दुनिया में सत्य को, धर्म को, मोक्ष को, शिव को, सुख को बताने वाला दिलाने वाला कोई नहीं है। सत्संग में जाए बिना सत्य मिलना संभव नहीं है। आज आर्यिका सौभाग्यमति माताजी के आहार का लाभ पहाडिय़ा परिवार व संक्षेमति व शिक्षामति माताजी के आहार का लाभ प्रदीप जैन परिवार को प्राप्त हुआ.