
Cherchera 2023
Cherchera 2023: छत्तीसगढ़ का लोकपर्व छेरछेरा (Cherchera parv 2023) शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन बच्चों की टोलियां सुबह से दान लेने के लिए निकलेंगी। खास बात यह है कि ये दान धन नहीं बल्कि धान का होगा। इस मौके पर दूधाधारी मठ में बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी इसमें शामिल होंगे।
गौरतलब है कि छेरछेरा (Cherchera 2023) छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्वों (Cherchera festival of chhattisgarh) में से एक है। इस दिन धान मांगने की परंपरा है। कृषक परिवार इस मौके पर विशेष पूजा-अर्चना भी करते हैं। इस दिन घरों के दरवाजे पर सुबह से आवाज सुनी जाती है... अरन बरन कोदो दरन, जभे देबे तभे टरन... छेरछेरा, माई कोठी के धान ले हेरते हेरा... दरअसल, इस दिन मोहल्लों में बच्चों और युवाओं की टोलियां सुबह से दान मांगने के लिए निकल पड़ती हैं। वैसे तो यह गांवों का त्योहार है, लेकिन शहर में भी इसकी रौनक देखने मिल जाती है। अब शहर में तो किसी के पास धान होता नहीं तो श्रद्धावश लोग रुपए-पैसे और खाने-पीने की दूसरी चीजें देकर दान करने की परंपरा निभाते हैं और त्योहार की खुशियां मनाते हैं।
Cherchera 2023: ऐतिहासिक मान्यता... रतनपुर से जुड़ा है छेरछेरा का इतिहास
ऐसी मान्यता है कि कौशल प्रदेश के राजा कल्याण साय मुगल सम्राट जहांगीर की सल्तनत में युद्ध कला का प्रशिक्षण लेने गए थे। उनकी अनुपस्थिति में 8 साल तक महारानी ने राज्य का काम संभाला। जब वे रतनपुर वापस लौटे तो महारानी ने सोने-चांदी के सिक्के बंटवाए। कहा जाता है कि इसी दिन से दान देने की परंपरा शुरू हुई और इस त्योहार को छेरछेरा का नाम दिया गया। सदियों से चली आ रही यह परंपरा अब छत्तीसगढ़ की संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है।
मठ में तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे कलेक्टर
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छेरछेरा पर श्रीदूधाधारी मठ में छेरछेरा मांगने के लिए पहुंचेंगे। मठ में इस आयोजन की भव्य तैयारियां शुरू हो गई हैं। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर भूरे ने बुधवार को निगम आयुक्त मयंक चतुर्वेदी के साथ मठ पहुंचकर पीठाधीश्वर राजेश्री महंत रामसुंदर दास से मुलाकात की और यहां चल रही तैयारियों का जायजा लिया।
पटेल समाज बांटेगा सब्जी
पटेल समाज के लिए इस दिन का विशेष महत्व है। दरअसल, समाज इस दिन अपनी आराध्य मां शाकंभरी की जयंती मनाता है। परंपरा के अनुसार समाज इस दिन सुबह माता की पूजा के बाद शहर के किसी एक स्थान पर नि:शुल्क सब्जियां भी बांटता है। राजेंद्र नायक ने बताया कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण पर्व है। हमारे समाज ने दान देने की भावना को सदियों से बचाए रखा है और दान की यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी। इसे संजोए रखने के लिए ही प्रति वर्ष छेरछेरा के पावन अवसर पर समाज द्वारा खुले हाथों से सब्जियां बांटी जाती हैं।
Published on:
05 Jan 2023 05:37 pm

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