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Chhattisgarh: लॉकडाउन में छत्तीसगढ़ ने प्रवासी मजदूरों को दिया सबसे ज्यादा काम

सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) का सर्वे

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Chhattisgarh: लॉकडाउन में छत्तीसगढ़ ने प्रवासी मजदूरों को दिया सबसे ज्यादा काम

Chhattisgarh: लॉकडाउन में छत्तीसगढ़ ने प्रवासी मजदूरों को दिया सबसे ज्यादा काम

मनरेगा के तहत छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा 70 फीसदी का रहा आंकड़ा
रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार लगातार श्रमिकों के हित में कार्य करने का प्रयास करती आ रही है। राज्य सरकार ने सबसे पहले लॉकडाउन के दौरान अन्य राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए ट्रेनें भेजीं और मजदूरों को वापस बुलवाया। इस दौरान छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार प्रवासी मजदूरों को दिया सबसे ज्यादा काम दिया और उनका सहारा बनी।
लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद कई राज्यों के मजदूरों ने शहरों से गांव की तरफ पलायन किया। जिसके बाद राज्यों के ओर से मनरेगा के तहत इन मजदूरों को काम देने की घोषणा की गई।
जब प्रवासी शहरों से गांव की तरफ लौट कर वापस आए तो मनरेगा को रोजगार का प्रमुख विकल्प माना जा रहा था। देश की प्रमुख शोध संस्था सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) के लोकनीति कार्यक्रम के परामर्श से पूरे भारत में गांव कनेक्शन सर्वे में सामने आया कि राजस्थान में 59 प्रतिशत लोगों को काम मिला यानी काम की मांग कर रहे आधे से ज्यादा लोगों को मनरेगा में काम मिला। इसी तरह छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में भी 70 और 65 प्रतिशत ग्रामीणों को लॉकडाउन के दौरान मनरेगा में काम मिल सका। वहीं गुजारत में यह आंकड़ा केवल 2 फीसदी का रहा।

लॉकडाउन में रेड, आरेंज और ग्रीन जोन का भी रहा प्रभाव
सर्वे में यह भी सामने आया कि देश में लगे लॉकडाउन के कारण इलाकों में बनाए गए रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन के कारण भी ग्रामीणों को मनरेगा में काम मिलना प्रभावित हुआ। उम्मीद के मुताबिक रेड जोन वाले जिलों में मनरेगा में कम लोगों को ही काम मिला। देश के 20 राज्यों, 3 केंद्रीय शासित राज्यों के 179 जिलों में 30 मई से लेकर 16 जुलाई 2020 के बीच यह सर्वे किया गया। केंद्र सरकार ने 21 अप्रैल से मनरेगा में लोगों को रोजगार दिए जाने की छूट दी थी। लेनि कई इलाकों में अभी भी मनरेगा का काम शुरू नहीं हो सका।