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छत्तीसगढ़ की यह बेटी चाहती है कल्पना सी उड़ान

रविवि की छात्रा नित्या पांडे यूनिवर्सिटी ऑफ चिली में स्पेस पर करेंगी रिसर्च, कल्पना चावला से मिली है प्रेरणा

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छत्तीसगढ़ की यह बेटी चाहती है कल्पना सी उड़ान

इससे पहले कल्पना चावला स्कॉलरशिप से इंटरनेशनल स्पेस सिटी फ्रांस में भी कर चुकी हैं स्टडी

ताबीर हुसैन @ रायपुर। कल्पना चावला अमर हो गईं। देश में हजारों लड़कियां उनसे प्रेरित होकर उनकी राह पर चलना चाहती हैं। इनमें से एक है पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर की छात्रा नित्या पांडे। रविवि से पीजी के बाद उनका सफर अंतरिक्ष की दुनिया जानने व समझने के साथ रिसर्च की ओर आगे बढ़ रहा है। नत्या पांडे का सलेक्शन यूनिवर्सिटी ऑफ चिली में पीएचडी के लिए हुआ है। इसके लिए 18 नवम्बर को इंटरव्यू लिए गए थे। इससे पहले मार्च में भी इंटरव्यू क्लियर हो गया था लेकिन कोविड के चलते प्रोसेस नहीं हो पाया था। नित्या ग्रहों और उल्कापिंडों पर रिसर्च करेंगी। पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति और धरती के बाहर लाइफ है या नहीं इस पर स्टडी करेंगी। उन्हें हर महीने 1000 यूएस डॉलर की स्कॉलरशिप भी मिलेगी।वे कोंडागांव की रहने वाली हैं। पिता भगवती प्रसाद पांडे हेडमास्टर हैं और मम्मी प्रमिला पांडे हाउसवाइफ। नित्या 4 साल चिली में रिसर्च स्टडी के बाद इसरो में काम करना चाहती हैं। नित्या की रुचि आर्चरी में भी है।

आज भी याद है वो दिन

मैं कक्षा चौथी में थी। 1 फरवरी 2005 का दिन मुझे अच्छे से याद है। क्लास टीचर छबीला सेठिया ने हम सभी बच्चों कल्पना चावला की शॉर्ट बायोग्राफी बताई। उनकी दूसरी पुण्यतिथि थी। वहीं से उत्सुकता बढ़ी। घर आकर मैंने पापा से कल्पना चावला के बारे में पूछा क्योंकि स्कूल में सिर्फ अंतरिक्ष और अंतरिक्ष यात्री को ही समझ पाई थी। पापा ने जब विस्तार से बताया तबसे कल्पना चावला मेरी आइडल बनी हुईं हैं। मेरे मोबाइल स्क्रीन पर उनकी फोटो है। रविवि में पढ़ते वक्त जहां रहती थी वहां उनका पोस्टर लगाया था। अभी घर में भी उन्हीं की तस्वीर है।

इंटरनेशनल स्पेस सिटी फ्रांस के लिए भी हुईं थीं चयनित

मेरा सलेक्शन इंटरनेशनल स्पेस सिटी फ्रांस के लिए हुआ था। संयोग देखिए कि मैं वहां कल्पना चावला स्कॉलरशिप के जरिए गई थी। देशभर में सिर्फ 4 लड़कियों को यह स्कॉलरशिप मिली थी। पिछले साल जून से अगस्त तक मैंने वहां पढाई की।

एस्ट्रोफिजिक्स ब्रांच में पहली बार 100 में 99 मार्क्स

रविवि में पीजी मे नित्या को ओवरऑल पांचवीं रैंक मिली थी। जबकि एस्ट्रोनॉमी में 100 में 99 माक्र्स। ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी स्टूडेंट को इतने नम्बर एस्ट्रोनॉमी में मिले हों।

ऐसे इम्प्रूव हुई इंग्लिश

बीएससी तक हिंदी मीडियम तक पढ़ाई के बाद एमएससी के लिए इंग्लिश की जरूरत पड़ी। क्लास में लेक्चर समझ नहीं आते थे। इसके लिए मैंने अंग्रेजी पेपर पढऩा शुरू किया। अंग्रेजी फिल्में देखनी शुरू की। इंग्लिश सॉन्ग सुनने लगी। क्लासमेट से इंग्लिश में बात करने का प्रयास किया। जब टाइम मिलता इंग्लिश टाइप करती थी। काफी मेहनत के बाद मैं इस लैंग्वेज पर पकड़ बनाने में कामयाब हो पाई।