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Chhattisgarh News : मां-बेटी की जोड़ी मधुबनी पेंटिंग के जरिए कैनवास पर उतार रहीं राम कथा, देखने वाले हो जाते हैं दंग

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इस समय चित्रकारों के लिए एक विशेष कैंप चल रहा है। इसमें देश के 6 प्रमुख राज्यों के चित्रकार अपनी कला को उकेर रहे हैं। इन सभी चित्रों को १८ जनवरी को प्रदर्शित किया जाएगा।

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Chhattisgarh News : मां-बेटी की जोड़ी मधुबनी पेंटिंग के जरिए कैनवास पर उतार रही राम कथा, देखने वाले  हो जाते हैं दंग

62 वर्षीय शांतिदेवी झा अपनी बेटी कुमकुम के साथ राम कथा पर पेंटिंग बनाती हुई

chhattisgarh news : संस्कृति विभाग परिसर स्थित आर्ट गैलरी में रामकथा पर आधारित चित्रकला शिविर चल रहा है। आदिवासी लोककला अकादमी की ओर से आयोजित शिविर में देश के 6 राज्यों से आए अवॉर्डी चित्रकार 6 अलग-अलग शैलियों में पेंटिंग बना रहे हैं। इनमें आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना से आए हैं। पत्रिका से खास बातचीत में चित्रकारों ने अपनी जर्नी को साझा किया। सभी का कहना है कि चित्रकारी उनकी विरासत की देन है जिसे अपने हुनर से आगे बढ़ा रहे हैं। 18 जनवरी को इन चित्रों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

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पत्थर से बनाते हैं रंग

कालिदास पुरस्कार से सम्मानित ओडिशा के 54 वर्षीय प्रहलाद महाराणा ने बताया, 35 सालों से पेंटिंग कर रहा हूं। मेेरे साथ पत्नी, बेटा भी पेंटिंग करते हैं। पेंटिंग की खासियत यह है कि ओडिशा पट्टी में लगाया पेंट का कलर सालों तक नहीं निकलता। यह बिल्कुल नेचुरल कलर होता है। समुद्र में मिलने वाले पत्थर की घिसाई कर रंग तैयार किया जाता है जो बाजार में नहीं मिलता। मैंने भागवत महापुराण समेत अन्य धार्मिक कथाओं को अपने ओडिशा पट्ट में उतारा है। यहां राम जन्म, सीता स्वयंवर को दर्शाया है।

अहिल्या देवी पुरस्कार

मधुबनी पेंटिंग के जरिए रामकथा को कैनवास पर उतार रही 62 वर्षीय शांतिदेवी झा अपनी बेटी कुमकुम के साथ आईं हैं। उन्होंने बताया, लगभग 10 साल की थी जब से पेंटिंग कर रही हूं। अब तक सांस्कृति, पारंपरिक से जुटी कई पेंटिंग बना चुकी हूं। 2018 में अहिल्या देवी पुरस्कार मिला। नेशनल लेवल में कई पुरस्कार मिल चुके हैं। मधुबनी पेंटिंग बनाना यह एक परंपरा बन गई है। मैंने सुंदरकांड, अशोक वाटिका को कैनवास पर उतारा है।

पूर्वजों से मिली कला को बढ़ा रहे

कमलादेवी पुरस्कार से सम्मानित तेलंगाना निवासी 27 वर्षीय विनय कुमार ने बताया, बचपन से ही पेंटिंग कर रहे हैं। माता-पिता, भाई-बहन सभी लोग पेंटिंग करते हैं। लगभग 700 साल से हमारे पूर्वज पेंटिंग करते हुए आ रहे हैं। चाहे मंदिरों में बनाना हो, कपड़ों में हो या फिर कैनवास पर। 3-4 साल का था तब से पेंटिंग करना शुरू किया। यहां मैंने कर्नाटक के चेरियल पट्टम पेंटिंग में अयोध्या कांड को कैनवास पर उतारा है।

इन छह शैलियों में कर रहे चित्रकारी

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