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रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी के निगम गार्डन में 20 से अधिक जिलों के पुलिस कर्मियों की बैठक हुई, जिसमें 25 जून को मुख्यमंत्री निवास घेराव के पर्चें बांटे गए, वहीं यह रणनीति बनी कि अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे पुलिस भर्ती नियम में बदलाव और पुलिस कर्मियों को केंद्र सरकार के तृतीय कर्मचारियों की तर्ज पर वेतन देने आदि मांगों पर सड़क पर उतरने का निर्णय लिया गया।
पुलिसकर्मियों के परिवार वाले करेंगे आंदोलन
इस बैठक में पुलिस जवानों के साथ उनके परिवार के लोग भी शामिल हुए। वेतन-भत्ता सहित 11 सूत्रीय मांगों पर यह प्रदर्शन किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पुलिसकर्मियों के परिवार वाले आंदोलन की तैयारी पूरी कर चुके हैं। मांगों को लेकर पुलिसकर्मियों के परिवार वालों ने रायपुर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी को पत्र के माध्यम से धरना प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी है। 25 जून रविवार प्रदर्शन लगभग तय है, यदि इस दिन आंदोलन को रोका गया तो पहले दिन या दूसरे दिन भी प्रदर्शन हो सकता है।
सोशल मीडिया के जरिए कर रहे एकजुट
पुलिस कर्मियों की बैठक पर अधिकारियों की नजर नहीं गई, सोशल मीडिया में वाट्सअप के बजाय पुलिस कर्मियों ने टेक्स्ट मैसेज के जरिए एक-दूसरे को संदेश भेजकर लोगों को एकजुट किया।
मांगों पर ध्यान दे सरकार : महंत
पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत ने कहा, प्रदेश के बीजेपी सरकार को कम से कम पुलिस के जवानों की मांगों को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए। उनका कहना था, माओवाद उन्मूलन के नाम पर केन्द्र से प्रदेश में अरबों की सहायता राशि आ रही है जिसका खर्च आधारभूत ढांचे के विकास के नाम पर किया जाना है। मगर उन क्षेत्रों में अपनी जान की बाजी लगाकर छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों को सुरक्षित माहौल देने वाले पुलिस कर्मियों की वेतन सुविधा व अन्य कल्याण के रूप में नहीं किया जा रहा है।
Updated on:
22 Jun 2018 03:03 pm
Published on:
18 Jun 2018 05:25 pm
